Bahula Chaturthi 2025 Moonrise Time: बहुला चतुर्थी पर कब उदय होगा चंद्रमा?

Published : Aug 12, 2025, 08:49 AM IST
bahula chaturthi 2025

सार

Bahula Chaturthi 2025: इस बार बहुला चतुर्थी का व्रत 12 अगस्त, मंगलवार को किया जा रहा है। इस दिन शाम को चंद्रोदय का समय सभी जानना चाहते हैं क्योंकि बिना चंद्रमा को देखो ये व्रत पूरा नहीं होता। जानें बहुला चतुर्थी 2025 पर कब निकलेगा चंद्रमा?

Bahula Chaturthi Par Kab Niklega Chandrma: हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इसे संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश की पूजा मुख्य रूप से की जाती है। इस दिन महिलाओं को चंद्रमा के उदय होने का बेसब्री से इंतजार रहता है क्योंकि इस व्रत में चंद्रमा की पूजा भी आवश्यक है। इसलिए व्रत करने वाली सभी महिलाएं जानना चाहती हैं कि बहुला चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय क्या है? आगे जानिए बहुला चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय…

बहुला चतुर्थी 2025 पर चंद्रोदय का समय क्या है?

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, 12 अगस्त, मंगलवार को बहुला चतुर्थी पर चंद्रमा रात को लगभग 8 बजकर 59 मिनिट पर उदय होगा। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में आंशिक परिवर्तन देखा जा सकता है। अगर आसमान साफ रहा तो उदय होने के कुछ देर बाद पूरे देश में चंद्रमा दिखाई देगा। इसे देखने के बाद महिलाएं अपना व्रत पूर्ण कर सकती हैं।
 

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बहुला चतुर्थी पर कैसे करें चंद्रमा की पूजा?

बहुला चतुर्थी पर पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है और इसके बाद चंद्रमा की। जब आप श्रीगणेश की पूजा कर लें तो इसके बाद चंद्रोदय का इंतजार करें। जब चंद्रमा दिखाई देने लगे तो इसे शुद्ध जल से अर्ध्य दें। फूल, चावल और कुमकुम चढ़ाएं। इसके बाद हाथ जोड़कर व्रत का पूरा फल प्रदान करने के लिए प्रार्थना करें।

बहुला चतुर्थी पर चंद्रमा दिखाई न दे तो क्या करें?

आसमान में बादल होने की वजह से कईं बार बहुला चतुर्थी पर चंद्रमा दिखाई नहीं देता। इस स्थिति में चंद्रोदय के समय को ध्यान में रखते हुए इसके कुछ देर बाद जिस दिशा में चंद्रमा उदय होता है, उस ओर खड़े होकर भी पूजा कर सकते हैं। ऐसा करने से भी आपको व्रत का पूरा फल मिलेगा।

चतुर्थी तिथि पर क्यों करते हैं श्रीगणेश और चंद्रमा की पूजा?

धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीगणेश का जन्म चतुर्थी तिथि पर ही हुआ था, इसलिए हर महीने की चतुर्थी तिथि पर इनकी पूजा विशेष रूप से की जाती है। प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार चंद्रमा ने श्रीगणेश के स्वरूप का मजाक उड़ाया था। क्रोध में आकर श्रीगणेश ने चंद्रमा की चमक कम होने का श्राप दे दिया। अपनी गलती का अहसास होने पर चंद्रमा ने श्रीगणेश से क्षमा मांगी। श्रीगणेश ने कहा कि आज से मेरे साथ हर चतुर्थी पर तुम्हारी भी पूजा होगी। तभी से श्रीगणेश के साथ चंद्रमा की पूजा की परंपरा चली आ रही है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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