नवरात्रि में किस वाहन से आएंगी देवी और किस वाहन से जाएंगी, कैसे होता है तय?

Published : Mar 25, 2025, 10:22 AM ISTUpdated : Mar 25, 2025, 11:55 AM IST
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सार

Chaitra Navratri 2025: इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरूआत 30 मार्च, रविवार से हो रही है, जो 6 अप्रैल, रविवार तक रहेगी। इस नवरात्रि का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। 

Chaitra Navratri 2025: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक वासंती नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 30 मार्च, रविवार से 6 अप्रैल, रविवार तक मनाया जाएगा। धर्म ग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि में हर बार देवी एक विशेष वाहन से धरती पर आती हैं और नवरात्रि समाप्त होने पर विशेष वाहन से पुन: लौट जाती हैं। देवी के आने-जाने का वाहन कैसे तय होता है, इसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी से जानें देवी के वाहन से जुड़ी रोचक बातें…

कैसे तय होता है देवी के आने का वाहन?

देवी पुराण के अनुसार…
शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे।
गुरौ शुक्रे चदोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता
तत्तफलम: गजे च जलदा देवी क्षत्र भंग स्तुरंगमे।
नोकायां सर्वसिद्धि स्या ढोलायां मरणंधुवम्।।

ये है श्लोक का अर्थ-
- जब नवरात्रि की शुरूआत सोमवार या रविवार को होती है तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आती हैं। जब देवी का वाहन हाथी होता है तो बारिश ज्यादा होती है।
- शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता का वाहन घोड़ा होता है। इस स्थिति में पड़ोसी देशों से युद्ध की आशंका बढ़ जाती है।
- जब भी नवरात्रि गुरुवार या शुक्रवार को शुरू होती है तो माता डोली में बैठकर धरती पर आती हैं। देवी जब डोली पर आती हैं तो महामारी का भय होता है।
- अगर नवरात्रि की शुरूआत बुधवार से हो तो माता नाव पर सवार होकर आती हैं। देवी का ये वाहन भी बहुत शुभ माना गया है।

कैसे तय होता है देवी के जाने का वाहन?

देवी पुराण के अनुसार…
शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुज शोककरा।
शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करी विकला।।
बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभ वृष्टिकरा।
सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा॥

ये है श्लोक का अर्थ
- जब रविवार और सोमवार को नवरात्रि का अंतिम दिन हो तो देवी भैंसे पर सवार होकर जाती हैं, इससे देश में रोग और शोक बढ़ता है।
- शनिवार और मंगलवार को जब नवरात्रि का समापन होता है तो देवी मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं, जिससे दुख और कष्ट बढ़ता है।
- जब बुधवार और शुक्रवार को नवरात्रि समाप्त होती हैं तो देवी हाथी पर जाती हैं, इससे बारिश ज्यादा होती है।
- गुरुवार को नवरात्रि समाप्त होने पर मां भगवती मनुष्य की सवारी से जाती हैं, इससे सुख और शांति की वृद्धि होती है।

चैत्र नवरात्रि 2025 में देवी का वाहन

इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरूआत 30 मार्च, रविवार से हो रही है, इसलिए देवी के आने का वाहन हाथी है और नवरात्रि का समापन 6 अप्रैल, रविवार को होगा, इसलिए देवी के जाने का वाहन भी हाथी रहेगा।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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