कौन है हिंदू नववर्ष 2082 का राजा और मंत्री, क्या है इसका नाम? जानें 5 अनसुनी बातें

Published : Mar 23, 2025, 05:57 PM IST
hindu navvarsh 2082

सार

Vikram Samvat 2082: हिंदू नववर्ष 2082 शुरू होने वाला है। इस हिंदू नववर्ष से जुड़ी अनेक ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में कम ही लोगों को पता हैं ,जैसे इस वर्ष के राजा और मंत्री कौन है। इस संवत्सर का नाम क्या है आदि? 

Vikram Samvat 2082: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हिंदू पंचांग के चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष की शुरूआत होती है। हर हिंदू वर्ष का अपना एक अलग नाम, राजा और मंत्री होते हैं। राजा और मंत्री का शुभ-अशुभ प्रभाव पूरे साल देश-दुनिया पर होता है। हिंदू वर्ष को विक्रम संवत और सवंत्सर के नाम से भी जाना जाता है। इस बार विक्रम संवत 2082 की शुरूआत होती। इससे जुड़ी कईं ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आगे जानें हिंदू वर्ष 2082 से जुड़ी रोचक बातें…

कब से शुरू होगा हिंदू नववर्ष 2082?

इस बार हिंदू नववर्ष 2082 की शुरूआत 30 मार्च, रविवार से होगी। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि भी शुरू होगी और गुड़ी पड़वा, उगादि आदि त्योहार भी इसी दिन मनाए जाएंगे। देखा जाए तो हिंदू कैलैंडर आधुनिक अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे है क्योंकि अंग्रेजी कैलेंडर में अभी 2025वां साल ही चल रहा है।

कौन है हिंदू नववर्ष 2082 का राजा-मंत्री?

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, हिंदू वर्ष 2082 के राजा और मंत्री दोनों ही सूर्यदेव हैं। इसका अर्थ है कि इस पूरे साल पर सूर्यदेव का प्रभाव सबसे अधिक रहेगा। 30 मार्च से शुरू होने वाले इस हिंदू नववर्ष का नाम सिद्धार्थी होगा।

इसी दिन हुआ था श्रीराम और युधिष्ठिर का राज्याभिषेक

धर्म ग्रंथों के अनुसार, त्रेतायुग में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ था। वहीं द्वापरयुग में धर्मराज युधिष्ठिर भी इसी दिन राजा बने थे और उन्होंने ही युगाब्द (युधिष्ठिर संवत) की शुरूआत की थी।

किसने शुरू किया विक्रम संवत?

सनातन धर्म में लाखों सालों का इतिहास बताया जाता है लेकिन वर्तमान में जो विक्रम संवत चल रहा है, उसे उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शुरू किया था। इसी विक्रम संवत 2082 की शुरूआत 30 मार्च, रविवार से होगी।

ये तिथि क्यों है इतनी खास?

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का विशेष महत्व ग्रंथों में बताया गया है। उसके अनुसार, ब्रह्मदेव ने इसी तिथि से सृष्टि का निर्माण शुरू किया था। इसलिए इसे सृष्टि का पहला दिन भी माना जाता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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