बंद होने पर भी मंदिर से आती है घंटी का आवाज, दरवाजा खुलते ही दिखता है चमत्कार

Published : Mar 25, 2025, 04:54 PM IST
Sharda-Mata-Mehar

सार

Chaitra Navratri 2025: हमारे देश में अनेक ऐसे मंदिर हैं जिनसे कोई न कोई चमत्कार जुड़ा हुआ है। ऐसा ही एक चमत्कारी मंदिर मध्य प्रदेश के मैहर नामक स्थान पर भी है। इसे देवी शारदा का मंदिर कहते हैं। 

Sharda Devi Temple Maihar: इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरूआत 30 मार्च, रविवार से होने जा रही है। चैत्र नवरात्रि में प्रमुख देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। ऐसा ही एक मंदिर मध्य प्रदेश के सतना जिले के मैहर में स्थित है, जिसे शारदा देवी मंदिर कहते हैं। इस मंदिर का इतिहास काफी रोचक है। लोग इस मंदिर को चमत्कारी मानते हैं क्योंकि यहां ऐसी घटनाएं होती रहती हैं जिन पर विश्वास कर पाना संभव नहीं है। जानें शारदा देवी मंदिर से जुड़े रहस्यों के बारे में…

बंद मंदिर से आती है घंटी की आवाज

शारदा माता मंदिर को लेकर कईं तरह की मान्यताएं हैं। स्थानीय लोगों को कहना है कि जब रात को जारी मंदिर के दरवाजे बंद कर देते हैं तो सुबह-सुबह अपने आप ही मंदिर के अंदर से घंटी की आवाज आने लगती है और जब पुजारी तय समय पर मंदिर का दरवाजा खोलते हैं तो यहां देवी प्रतिमा के आगे फूल चढ़े होते हैं। ऐसा लगता है कि किसी न सुबह आकर यहां पूजा की हो। लोगों को ये भी कहना है कि माता के भक्त आल्हा यहां रोज सुबह आकर पूजा करके चले जाते हैं।

कौन हैं आल्हा, जो करते हैं देवी की पूजा?

इतिहासकारों के अनुसार, बुंदेलखंड में परमार वंश के दो भाई थे, जिनके नाम आल्हा और ऊदल था। ये दोनों ही भाई बहुत ही पराक्रमी थे। इन्होंने अपनी अंतिम लड़ाई पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ लड़ी थी, जिसमें इन्होंने चौहान को पराजित कर दिया था। अपने गुरु गोरखनाथ के आदेश पर आल्हा ऊदल ने पृथ्वीराज चौहान को छोड़ दिया और वैराग्य ले लिया। इनमें से आल्हा माता शारदा का परम भक्त था। मान्यता है कि आल्हा आज भी जीवित हैं और वे शारदा माता की पूजा करने रोज मंदिर में आते हैं।

यहां गिरा था देवी सती का हार

लोक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने देवी सती के मृत शरीर को अपने चक्र से काटा तो उनके टुकड़े जहां-जहां गिरे, वो स्थान शक्तिपीठ कहलाए। कहते हैं कि मैहर में देवी सती के गले का हार गिरा, जिसके चलते इसका नाम मैहर पड़ा। शारदा देवी का मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। ये त्रिकूट पर्वत पर 600 फीट की ऊंचाई पर बना है। यहां तक पहुंचने के लिे भक्तों को 1001 सीढ़ियां चढ़नी होती है।


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