‘पंचकेदार’ के बिना अधूरे हैं केदरनाथ दर्शन, कहीं शिवजी के मुख तो कहीं होती नाभि की पूजा

Published : Apr 29, 2025, 11:18 AM IST
Panchkedar

सार

Char Dham Yatra Uttarakhand 2025: उत्तराखंड की चार धाम यात्रा 30 अप्रैल, बुध‌वार से शुरु हो जाएगी। इन चार धामों में केदारनाथ भी प्रमुख है। केदारनाथ के आस-पास 4 अन्य मंदिर भी है, जिन्हें पंच केदार कहते हैं। 

Uttarakhand 2025 Char Dham Yatra: 30 अप्रैल, बुधवार से उत्तराखंड की चार धाम यात्रा शुरू होगी। इस चार धाम यात्रा में केदरनाथ भी एक है। ये 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। 2 मई को केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। केदारनाथ के आस-पास महादेव के 4 अन्य मंदिर भी हैं, जिन्हें पंचकेदार कहा जाता है। इन सभी मंदिरों से अलग-अलग मान्यताएं और परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इनके रहस्य भी आज तक कोई समझ नहीं पाया। आगे जानिए पंचकेदार में कौन-कौन से मंदिर शामिल हैं…

सबसे पहला मंदिर है केदारनाथ

केदारनाथ पंचकेदार में से सबसे प्रमुख है। केदारनाथ उत्तराखंड के 4 धामों के साथ-साथ 12 ज्योतिर्लिंगो में शामिल है। मान्यता है कि केदारनाथ में जो शिवलिंग स्थापित है, उसकी स्थापना पांडवों ने की थी। इस गणना से देखा जाए तो केदारनाथ मंदिर 5 हजार साल से ज्यादा प्राचीन है। आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर की खोज की और जीर्णोद्धार भी करवाया। इस मंदिर से जुड़ी कईं मान्यताएं इसे और भी खास बनाती हैं।

सबसे ऊंचाई पर है तुंगनाथ मंदिर

पंचकेदार में दूसरे नंबर पर आता है तुंगनाथ मंदिर। इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि पंच केदार में से ये सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित है। इसलिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं है। इस मंदिर में भगवान शिव के हृदय और भुजाओं की पूजा की जाती है। इस मंदिर का इतिहास भी महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।

रुद्रनाथ में होती है शिवजी के मुख की पूजा

रुद्रनाथ मंदिर पंचकेदार में तीसरे नंबर पर आता है। इस मंदिर में शिवजी के एकानन स्वरूप यानी मुख की पूजा होती है। ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर पांडवों को बैल के रूप में शिव दिखाई दिए थे। यहां तक आने के लिए चामोली के सागर नामक स्थान से 18 किलोमीटर का दुर्गम मार्ग है।

यहां होती है शिवजी की नाभि की पूजा

पंचकेदार में चौथे स्थान है मध्यमहेश्वर मंदिर, जो रुद्रप्रयाग जिले में है। यहां शिवजी की नाभि की पूजा करने की परंपरा है। ये मंदिर लगभग 3500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए गौरीकुंड करीब 16 किमी की सीधी चढ़ाई है, जो काफी मुश्किल है। इसी वजह से बहुत क लोग यहां तक आ पाते हैं।

यहां होती शिवजी की जटाओं की पूजा

पंचकेदार में सबसे अंतिम है कल्पेश्वर मंदिर, जो उत्तराखंड के गढ़वाल में है। यहां शिवजी की जटाओं की पूजा की जाती है। ये मंदिर पूरे साल खुला रहता है क्योंकि यहां बर्फ का प्रभाव नहीं होता। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए कईं गुफाओं से होकर गुजरना पड़ता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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