ये हैं वो 4 श्मशान जहां अघोरी करते हैं शव और श्मशान साधना

Published : Feb 05, 2025, 10:21 AM IST
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सार

Gupt Navratri 2025: इन दिनों गुप्त नवरात्रि चल रही है। गुप्त नवरात्रि में अघोरी व अन्य तंत्र साधक श्मशान में जाकर तंत्र साधना करते हैं और गुप्त सिद्धियां प्राप्त करते हैं। तंत्र साधना के लिए देश भर में 4 प्रमुख श्मशान हैं। 

माघ मास की गुप्त नवरात्रि 6 फरवरी, गुरुवार को समाप्त हो जाएगी। ये गुप्त नवरात्रि तंत्र साधकों के लिए बहुत ही खास होती है। गुप्त नवरात्रि में अघोरी और तंत्र साधक गुप्त स्थानों पर या सिद्ध श्मशानों में जाकर साधना करते हैं। अघोरी मुख्य रूप से शव, शिव और श्मशान साधना करते हैं। देश भर में 4 ऐसे श्मशान हैं, जहां दूर-दूर से अघोरी तंत्र साधना के लिए आते हैं। मान्यता है कि इन 4 श्मशानों में की गई साधना बहुत ही जल्दी सिद्ध हो जाती है। आगे जाने कहां हैं वो 4 श्मशान…

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तारापीठ का श्मशान

पश्चिम बंगाल के वीरभूमि जिले में देवी का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे तारापीठ कहते हैं। ये मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर में मां काली के एक रुप तारा मां की प्रतिमा स्थापित है। यहां स्थित शमशान में कई साधक साधनाएं करने आते हैं। गुप्त नवरात्रि व अन्य विशेष मौकों पर यहां अघोरियों की भीड़ उमड़ती है। इसे जादूनगरी भी कहते हैं। दिवाली की रात यहां विशेष पूजा होती है। यहां के श्मशान को लोग बहुत ही पवित्र मानते हैं, इसलिए यहां की राख लोग अपने घर ले जाते हैं और इसकी पूजा करते हैं।

कामाख्या पीठ का श्मशान

असम के गुवाहाटी शहर से 8 किलोमीटर दूर देवी कामाख्या का मंदिर है। इस मंदिर में भगवती की महामुद्रा (योनि-कुण्ड) स्थित है। प्राचीन काल से ही कामाख्या मंदिर तंत्र सिद्धि के लिए जाना जाता है। इस मंदिर से कुछ दूरी पर ही प्रसिद्ध श्मशान है। यहां भी अघोरी तंत्र साधना करने आते हैं। कईं साधक तो इसी श्मशान में कुटिया बनाकर रहते भी हैं। गुप्त नवरात्रि में यहां आने वाले अघोरियां की संख्या एकदम बढ़ जाती है।

त्र्यम्बक का श्मशान

महाराष्ट्र के नासिक जिले में त्र्यम्बक में 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक त्र्यम्बकेश्वर स्थित है। भगवान शिव को तंत्र शास्त्र का देवता माना जाता है। तंत्र और अघोरवाद के जन्मदाता भगवान शिव ही हैं। इसलिए यहां की मान्यता काफी अधिक है। त्र्यम्बक का श्मशान भी तंत्र साधना के लिए जाना जाता है। महाशिवरात्रि व अन्य विशेष मौकों पर यहां तंत्र साधक आते हैं और गुप्त सिद्धियां प्राप्त करते हैं।

उज्जैन का चक्रतीर्थ श्मशान

मध्य प्रदेश के उज्जैन में 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर स्थित है। ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग हैं, जिसके चलते यहां तंत्र साधना का विशेष महत्व माना जाता है। यहां के श्मशान को चक्रतीर्थ कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि ये श्मशान भगवान विष्णु के चक्र पर स्थित है। यहां भी अघोरी साधक दूर-दूर से आते हैं।


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