Hindu New Year: हिंदू कैलेंडर अंग्रेजी से बहुत अलग है। ये 1 जनवरी से शुरू नहीं होता। हिंदू नववर्ष की शुरूआत खास त्योहारों से होती है और इस नववर्ष से अनेक मान्यताएं भी जुड़ी हुई है। आगे जानिए हिंदू नववर्ष से जुड़ी रोचक जानकारी।
Vikram Samvat 2083 Date: पूरी दुनिया में भले ही 1 जनवरी से नए साल की शुरूआत मानी जाती है लेकिन हिंदू कैलेंडर में नया साल चैत्र मास से शुरू होता है। आज भी भारत में हिंदू नववर्ष पर अनेक आयोजन किए जाते हैं और भजन-कीर्तन कर नववर्ष का स्वागत किया जाता है। हिंदू कैलेंडर से जुड़ी अनेक ऐसी बातें हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को पता है। आगे जानिए इस बार हिंदू नववर्ष कब से शुरू होगा और इसका नाम क्या है?
हिंदू कैलेंडर को विक्रम संवत के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में विक्रम संवत 2082 चल रहा है। विक्रम संवत उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने शुरू किया था। हिंदू कैलेंडर अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे है। इसी से इसकी प्राचीनता का अंदाजा लगाया जा सकता है। हिंदुओं के सभी तीज-त्योहार विक्रम संवत की तिथियों को अनुसार ही किए जाते हैं।
हिंदू नववर्ष की शुरूआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है, जो इस बार 19 मार्च 2026 को है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 शुरू होगा। हिंदू नववर्ष के पहले दिन गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है और वासंती नवरात्रि की शुरूआत भी इसी दिन से होती है। खास बात ये है कि ये हिंदू वर्ष 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का रहेगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि इस वर्ष ज्येष्ठ का अधिक मास भी रहेगा।
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हर साल का अलग नाम भी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हिंदू वर्ष को संवत्सर भी कहा जाता है और हर संवत्सर का एक अलग नाम और महत्व भी बताया गया है। वर्तमान में विश्वावसु नाम का संवत्सर चल रहा है। इसके बाद 19 मार्च से सिद्धार्थी नाम का संवत्सर शुरू होगा। सिद्धार्थी संवत्सर का राजा गुरु और मंत्री मंगल ग्रह रहेगा जिसके चलते इस वर्ष पर इन दोनों ग्रहों का प्रभाव अधिक रहेगा। अंग्रेजी कैलेंडर की तरह इसमें भी 12 महीने हैं, जिनके नाम चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन।
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चैत्र मास से ही क्यों शुरू होता है हिंदू नववर्ष?
हिंदू नववर्ष की शुरूआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष से ही क्यों होती है, इसके पीछे भी कईं कारण हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार पितामह ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि निर्माण का काम शुरू किया था, इसलिए इसे सृष्टि का प्रथम दिन भी माना जाता है। चारों युगों में सबसे पहले सतयुग की शुरूआत भी इसी दिन से मानी जाती है, इसी कारण राजा विक्रमादित्य ने इसी तिथि से विक्रम संवत की शुरूआत की।
Disclaimer इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।