महाभारत युद्ध में मारे गए दुर्योधन सहित 100 भाई, फिर कैसे एक भाई रह गया जिंदा?

Published : Sep 09, 2024, 02:50 PM ISTUpdated : Sep 09, 2024, 05:31 PM IST
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सार

Mahabharata Facts: महाभारत में ऐसे अनेक पात्र हैं, जिनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है, युयुत्सु भी इनमें से एक है। युयुत्सु राजा धृतराष्ट्र के पुत्र थे, जो युद्ध के बाद भी जीवित रहे। इनसे जुड़ी कईं रोचक बातें महाभारत में बताई गई हैं। 

Interesting facts about Mahabharata: महाभारत की कथा जितनी रोचक है, उतनी ही विचित्र भी। इस ग्रंथ में कईं ऐसे पात्र हैं, जिनके बारे में आम लोगों को कम ही जानकारी है। ऐसा ही एक पात्र है युयुत्सु। दुर्योधन की तरह युयुत्सु भी राजा धृतराष्ट्र का ही पुत्र था। महाभारत युद्ध के बाद धृतराष्ट्र के पुत्रों में एकमात्र युयुत्सु ही जीवित रहा। आगे जानिए युयुत्सु से जुड़ी रोचक बातें…

दुर्योधन का सौतेला भाई था युयुत्सु
महाभारत के अनुसार, राजा धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी के 100 पुत्र थे, इनमें से सबसे बड़ा दुर्योधन था। जब गांधारी गर्भवती थी, उस समय धृतराष्ट्र की सेवा एक वैश्य कन्या कर रही थी, युयुत्सु उसी का पुत्र था। चूंकि युयुत्सु धृतराष्ट्र की ही संतान था, इसलिए उसे भी वही सम्मान प्राप्त था, जो गांधारी के पुत्रों को मिलता था।

युद्ध में दिया पांडवों का साथ
जब कौरव और पांडवों की सेना कुरुक्षेत्र में आमने-सामने आ गई तब धर्मराज युधिष्ठिर ने घोषणा की कि ‘जो भी योद्धा पांडवों की सेना से निकलकर कौरवों के साथ शामिल होना चाहता है या जो कौरव सेना से हमारी सेना में आना चाहता है, वो इसके लिए स्वतंत्र है।’ तब युयुत्सु कौरव सेना को छोड़कर पांडवों की सेना में शामिल हो गया। इसी वजह से उसके प्राण बच गए।

युद्ध के बाद युयुत्सु का क्या हुआ?
युद्ध के बाद जब धर्मराज युधिष्ठिर हस्तिनापुर के राजा बने तब उन्होंने युयुत्सु से कहा कि ‘तुम हमेशा राजा धृतराष्ट्र की सेवा में रहना और उन्हीं की आज्ञा की पालन करना। यही तुम्हारा मुख्य काम है।’ महाप्रास्थानिक पर्व के अनुसार, अंत समय में जब पांडवों ने हस्तिनापुर का त्याग किया तब उन्होंने परीक्षित को राजा बनाकर युयुत्सु को ही संपूर्ण राज्य की देख-भाल करने के लिए कहा था।


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