Jagannath Rath Yatra 2024: भगवान जगन्नाथ की आंखों पर पलकें क्यों नहीं बनाई जाती?

Published : Jun 30, 2024, 09:56 AM ISTUpdated : Jul 10, 2024, 10:19 AM IST
jagnnath ratha yatra 2024

सार

Jagannath Rath Yatra 2024: आषाढ़ मास में हर साल उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर से प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जाती है। इस रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के साथ-साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं भी होती हैं। 

Kab Se Shuru Hogi Jagannath Rath Yatra 2024: उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर अपनी परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां हर साल आषाढ़ मास में रथयात्रा निकाली जाती है। इस यात्रा को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त यहां आते हैं। इस बार ये रथयात्रा 7 जुलाई, रविवार से शुरू होगी। रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ के साथ भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमा भी होती है। भगवान जगन्नाथ की इस प्रतिमा में उनकी आंखें काफी बड़ी बनाई जाती हैं और उनके ऊपर पलकें नहीं बनाई जाती। इसके पीछे भी एक मान्यता है, आगे जानिए इससे जुड़ी खास बातें…

क्यों भगवान जगन्नाथ की आंखें हैं इतनी बड़ी?
आमतौर पर जब भी किसी देवी-देवता की प्रतिमा बनाई जाती है तो उनकी आंखें बहुत ही सौम्य बनाई जाती है, लेकिन जगन्नाथ भगवान की आंखें बहुत ही बड़ी बनाई जाती हैं। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए रोज लाखों लोग आते हैं। भगवान की नजर से कोई भक्त छूट न जाए इसलिए इनकी आंखें इतनी बड़ी बनाई जाती हैं।

क्यों नहीं है भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा की पलकें?
स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए यहां लोगों को हुजूम उमड़ता है। अगर भगवान एक पल के लिए भी अपने आंखें मूंद लें या पलक झपका लें तो इस बीच कईं हजार भक्तों को वे देख नहीं पाएंगे। इसलिए भगवान जगन्नाथ की आंखों पर पलकें नहीं बनाई जाती ताकि वे अपलक अपने भक्तों को देखते रहें। भक्त भले ही भगवान के दर्शन न कर पाएं लेकिन भगवान की नजरों से कोई भक्त छूटना नहीं चाहिए।

कितने सालों में बदलती है भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा?
भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की जो प्रतिमाएं मंदिर में स्थापित हैं वे स्थाई नहीं हैं। जब भी आषाढ़ का अधिक मास आता हैं तब मंदिर में स्थापित पुरानी प्रतिमाओं को समुद्र में प्रवाहित कर दिया जाता है और नई प्रतिमाओं का निर्माण कर विधि-विधान से उसकी स्थापना की जाती है। इस उत्सव को नव कलेवर कहते हैं।


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Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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