Kab Hai Jitiya 2025: किस देवता की होती है पूजा? जानें नहाय-खाय, पारण का शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और नियम

Published : Sep 04, 2025, 01:06 PM IST
Jivitputrika Vrat

सार

Jitiya Shubh Muhurat 2025: इस बार जितिया व्रत 14 सितंबर 2025 रविवार को मनाया जाएगा। इस दौरान महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और अगली सुबह पारण करती हैं। आइए जानते हैं जितिया पूजा के लिए कब है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

Jitiya Vrat 2025: जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में जितिया व्रत को बहुत ही खास माना जाता है। हिंदू परंपराओं के अनुसार, जितिया व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। यह व्रत केवल पितृ पक्ष के दौरान ही महिलाएं रखती हैं। जितिया व्रत का महत्व अपनी संतान की सुरक्षा और उनकी लंबी आयु की कामना करना है। यह व्रत विशेष रूप से पुत्र सहित सभी संतानों की कुशलता और लंबी आयु के लिए रखा जाता है। जितिया व्रत मुख्य रूप से बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में रखा जाता है। इस बार जितिया व्रत 14 सितंबर 2025, रविवार को रखा जाएगा।

जितिया व्रत का महत्व

मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान को कोई दुःख नहीं होता और उनकी आयु बढ़ती है। यह व्रत न केवल पितृ पक्ष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को, बल्कि नवरात्रि के दौरान पड़ने वाली आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को भी रखा जाता है। दोनों व्रतों का फल एक ही है। इसलिए कोई भी महिला अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार इनमें से कोई भी व्रत रख सकती है।

जितिया व्रत में कब है शुभ मुहूर्त ?

जितिया व्रत की अष्टमी तिथि 14 सितंबर को सुबह 5:04 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 3:06 बजे समाप्त हो जाएगी। इसके साथ ही, जितिया व्रत का पारण 15 सितंबर, सोमवार को होगा।

जितिया व्रत नहाय खाय मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, हर साल आश्विन माह में कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को जितिया व्रत का नहाय खाय होता है। इस बार जितिया का नहाय खाय 13 सितंबर को होगा। वहीं, जितिया का ओठगन रविवार, 14 सितंबर को सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में होगा।

ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 4:33 बजे से 5:19 बजे तक रहेगा।

जीवित्पुत्रिका व्रत कथा

हिंदू मान्यता के अनुसार, कलियुग के आरंभ में जितिया व्रत की शुरुआत हुई थी। ऐसा माना जाता है कि एक बार जीमूतवाहन नामक राजा कहीं जा रहे थे, तभी उन्हें एक महिला के रोने की आवाज़ सुनाई दी। उसके पास जाने पर उन्हें पता चला कि आज भगवान विष्णु का वाहन उनके पुत्र को ले जाएगा और उसे खा जाएगा। तब राजा ने उस महिला को आश्वासन दिया कि वह उसके पुत्र के बजाय गरुड़ का भोजन बनेगा। जब वह उस महिला के पुत्र के स्थान पर उपस्थित हुए, तो गरुड़ राजा की दानशीलता से प्रसन्न हुए और उन्हें वैकुंठ जाने का आशीर्वाद दिया और बाकी बच्चों को भी पुनर्जीवित कर दिया। ऐसा माना जाता है कि तभी से महिलाएं अपनी संतान की सुरक्षा और सौभाग्य के लिए इस दिन जीमूतवाहन देवता का व्रत और पूजा करने लगीं।

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जीवित्पुत्रिका व्रत पूजा विधि

जीवित्पुत्रिका व्रत भी छठ के समान ही है। जितिया व्रत का पुण्य प्राप्त करने के लिए महिलाओं को इस व्रत से एक दिन पहले नहाय-खाय की परंपरा का पालन करना होता है। इस दिन महिलाओं को सात्विक भोजन बनाकर सबसे पहले अपने पितरों को और फिर कौओं आदि को अर्पित करना होता है। जितिया व्रत के दिन महिलाओं को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए और पूरे दिन निर्जल व्रत रखना चाहिए। 

कैसे करें जीवित्पुत्रिका व्रत की पूजा?

जितिया व्रत की पूजा करने के लिए घर में किसी पवित्र स्थान पर मिट्टी और गोबर से लीपकर एक छोटा सा तालाब बनाएं और उसमें कुशा की सहायता से भगवान जीमूतवाहन की स्थापना करें। इसके साथ ही मिट्टी और गोबर की सहायता से चील और सियार की मूर्ति बनाकर उनकी भी साथ में पूजा करें। भगवान जीमूतवाहन को धूप-दीप, माला-फूल, रोली-सिंदूर, मिठाई-फल आदि अर्पित करके जितिया व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। व्रत के अगले दिन शुभ मुहूर्त में व्रत तोड़ें और भगवान जीमूतवाहन से संतान की लंबी आयु का आशीर्वाद मांगें। इसके बाद लाल, पीले और हरे रंग के धागे भगवान को समर्पित किए जाते हैं और बच्चों की रक्षा के लिए उन्हें पहनाए जाते हैं। ये धागे बच्चों की लंबी उम्र और सुख की कामना करते हैं।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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