Kartik Maas Deepdan: कार्तिक माह में दीपदान क्यों है इतना शुभ? जानें कब और कैसे करें दीपदान

Published : Oct 11, 2025, 09:10 PM IST
Kartik Maas Deepdan

सार

हिंदू पंचांग में कार्तिक माह को सबसे पवित्र महीना माना गया है, और इस महीने में दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। दीपदान का अर्थ है- दीपक जलाकर देवता, नदी या तुलसी के समक्ष अर्पित करना। आइए जानते है कब और कैसे करें दीपदान?

What is Deepdan: कार्तिक माह हिंदू पंचांग का आठवां महीना है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दौरान भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा का विशेष महत्व है। इसके अलावा, कार्तिक माह में दीपदान करना बहुत ही विशेष माना जाता है। इस लेख में, हम दीपदान क्या है, दीपदान की विधि और कार्तिक माह में दीपदान के महत्व के बारे में बताएंगे।

दीपदान क्या है?

दीपदान का अर्थ है दीपक जलाकर उसका दान करना या उसे किसी उपयुक्त स्थान पर रखना। दीपदान किसी देवता, पवित्र नदी या किसी विद्वान ब्राह्मण के घर पर किया जाता है। दीपदान मुख्य रूप से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। दीपदान को ज्ञान और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक भी माना जाता है। विशेष रूप से कार्तिक माह में दीपदान का विशेष महत्व होता है और यह अनंत पुण्य प्रदान करता है।

कार्तिक मास में दीपदान का महत्व

कार्तिक मास में दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कार्तिक मास में दीपदान करने से दिव्य तेज की प्राप्ति होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक मास में दान करने से व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है और अगले जन्म में कुलीन कुल में जन्म लेने का वरदान प्राप्त होता है।

  • मोक्ष और पुनर्जन्म से मुक्ति: कार्तिक मास में दीपदान करने से व्यक्ति जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है।
  • दिव्य तेज की प्राप्ति: कार्तिक मास में श्री केशव के पास अखंड दीपदान करने से व्यक्ति दिव्य तेज से युक्त हो जाता है।
  • पुण्य प्राप्ति: कार्तिक मास में दीपदान करने से व्यक्ति को सभी यज्ञों और तीर्थों का फल प्राप्त होता है, जो अन्य दान-पुण्य से कहीं अधिक होता है।
  • पापों का नाश: कार्तिक मास में सूर्योदय से पूर्व स्नान और दीपदान करने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
  • अगले जन्म में शुभ फल: कार्तिक मास में तुलसी के समक्ष दीपदान करने से अगले जन्म में कुलीन कुल में जन्म लेने की संभावना बढ़ जाती है।

कार्तिक मास में दीपदान करने से किन लोकों की प्राप्ति होती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में दीपदान करने से विष्णु लोक, लक्ष्मी लोक और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, कार्तिक मास में दीपदान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति भी होती है। कार्तिक मास में मंदिर में दीपदान करने से विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। नदी तट पर दीपदान करने से पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। घर के मुख्य द्वार पर या तुलसी के पौधे के पास दीपदान करने से धन-समृद्धि आती है और सभी पापों का नाश होता है।

दीपदान कब करें?

कार्तिक मास, जिसे दीपावली का महीना भी कहा जाता है, विशेष रूप से दीपदान किया जाता है। इसके अलावा, दिवाली, नरक चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। दीपक अंधेरा होने के बाद, यानी सूर्योदय (ब्रह्म मुहूर्त) से पहले या सूर्यास्त के बाद जलाना चाहिए। घर के पूजा स्थल में, तुलसी के पौधे के पास, नदी या तालाब के किनारे और मंदिरों में दीपक जलाए जाते हैं।

दीपदान करते समय किस मंत्र का जाप करना चाहिए?

कार्तिक माह में दीपदान करते समय "शुभं करोति कल्याणं" मंत्र का जाप करना चाहिए, जिसका अर्थ है, "उस दीपक की ज्योति को नमस्कार जो सौभाग्य और कल्याण लाती है, स्वास्थ्य और धन प्रदान करती है, और शत्रुओं के विचारों का नाश करती है।"

कार्तिक माह में दीपदान कैसे करें?

  • दीपक तैयार करें: एक मिट्टी का दीपक लें और उसमें घी या तिल का तेल भरें। फिर, एक रूई की बत्ती बनाकर उसे दीपक में रखें।
  • स्थान चुनें: आप नदी या तालाब के किनारे, घर के मंदिर के पास या तुलसी के पौधे के पास दीपदान कर सकते हैं।
  • दीपक रखें: मिट्टी को नुकसान से बचाने के लिए दीपक को सीधे ज़मीन पर रखने के बजाय, चावल या सप्तधान पर रखें।
  • प्रार्थना और मंत्र: दीपक जलाते समय, ईश्वर का स्मरण करें और अपनी इच्छा व्यक्त करें।
  • जल अर्पित करें: दीपक के साथ थोड़ा जल भी अर्पित करें।
  • घर वापसी: दीपक जलाकर पूजा करने के बाद, बिना पीछे देखे घर वापस आ जाएं।

दीपदान के नियम

  • दीप जलाने के लिए दीपक और बाती की संख्या आपकी इच्छा के अनुसार निर्धारित की जाती है।
  • यदि आप नदी पर नहीं जा सकते हैं, तो आप घर पर ही नदी का आह्वान करके दीपक अर्पित कर सकते हैं।
  • दीपदान करते समय, एक दीपक को दूसरे से नहीं जलाना चाहिए।

Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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