Karwa Chauth 2025: बिंदी, बिछिया समेत ये 16 श्रृंगार के बिना अधूरा है करवा चौथ का व्रत, जानें हर श्रृंगार का महत्व

Published : Oct 10, 2025, 04:39 PM IST
Karwa Chauth 2025

सार

करवा चौथ 2025 पर सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोलह श्रृंगार के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है? जानें बिंदी, सिंदूर, मांगटीका, बिछिया और अन्य महत्वपूर्ण श्रृंगार का महत्व…

Karwa Chauth 2025: करवा चौथ एक ऐसा त्योहार है जिसका सभी विवाहित महिलाएं साल भर बेसब्री से इंतज़ार करती हैं। इस त्योहार के लिए खरीदारी करने वाली महिलाओं से बाज़ारों में भीड़ उमड़ पड़ती है। इस साल करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर को रखा जाएगा। यह व्रत पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत न केवल पति-पत्नी के रिश्ते को मज़बूत करने के लिए है, बल्कि इसे विश्वास और प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। करवा चौथ पर महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले सोलह श्रृंगार बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। तो आइए जानें कि इन सोलह श्रृंगारों में क्या-क्या शामिल है।

करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार का महत्व

ऐसा माना जाता है कि करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार करने से व्रती महिलाओं पर करवा और पार्वती का आशीर्वाद बना रहता है। ऐसा कहा जाता है कि करवा चौथ पर सोलह श्रृंगार करने से वैवाहिक जीवन मज़बूत होता है और पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है। आइए अब जानते हैं कि सोलह श्रृंगार में क्या-क्या शामिल है। सोलह श्रृंगार में बिंदी, सिंदूर, मांगटीका, काजल, नाक की नथ, झुमके, हार, हरी और लाल चूड़ियां, मेहंदी, बिछिया, कंगन, पायल, गजरा, मंगलसूत्र, अंगूठी, वस्त्र, इत्र, बाजूबंद और कमरबंद शामिल हैं।

करवा चौथ पर इन रंगों के वस्त्र पहनने से बचें

करवा चौथ पर महिलाओं को काले, सफ़ेद या किसी भी गहरे रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। पीला, लाल या हरा वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, इस दिन निर्जला व्रत रखना चाहिए और किसी भी नुकीली वस्तु का उपयोग करने से बचना चाहिए।

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करवा चौथ 2025 पूजन विधि

पूरे दिन उपवास रखने के बाद, शाम को करवा चौथ की पूजा की जाती है। एक थाली में करवा (मिट्टी का बर्तन), एक दीपक, चावल, मिठाई, जल और रोली (सिंदूर) रखी जाती है। महिलाएं सोलह श्रृंगार करके कथा सुनने के लिए एक साथ बैठती हैं।

कथा सुनने के बाद, महिलाएं करवा और मिट्टी के दीपक की पूजा करती हैं। करवा पर जल, मिठाई और दक्षिणा अर्पित की जाती है। फिर, चांद की प्रतीक्षा की जाती है। छलनी से चांद को देखकर अर्घ्य दिया जाता है और फिर पति के हाथ से जल पीकर व्रत तोड़ा जाता है।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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