घर आए मेहमान का जरूर करें आदर-सत्कार, नहीं तो वो हमारी ये मूल्यवान चीज ले जाता है

Published : Jan 29, 2023, 02:59 PM IST
life managment 2023

सार

life management: हिंदू धर्म में अतिथि यानी मेहमान को देवता के समान माना जाता है, इसलिए कहा जाता है कि अतिथि देवो भव:। इसका अर्थ है कि अतिथि हमारे लिए भगवान के समान है। अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है कि अतिथि का आदर-सत्कार क्यों करना चाहिए। 

उज्जैन. हिंदू धर्म में अतिथियों का स्वागत-सत्कार गृहस्थों के लिए अनिवार्य बताया गया है। ऐसा भी कहा जाता है कि यदि गलती से कोई दुश्मन भी हमारे घर अतिथि बनकर आ जाए तो उसका भी आदर हमें करना चाहिए। (life management) आचार्य विष्णु शर्मा ने पंचतंत्र में अतिथि सत्कार के बारे में काफी लिखा है। वेदों से लेकर महाभारत (Mahabharata) तक, गृहस्थों के लिए जो नियम बताए गए हैं, उनमें अतिथि के सम्मान की बात अनिवार्य बताई गई है। आगे जानिए किस ग्रंथ में अतिथि के लिए क्या कहा गया है…

महाभारत (Mahabharata) के अनुसार…
अतिथिर्यस्य भग्नाशो गृहात् प्रतिनिवर्तते।
स दत्त्वा दुष्कृतम् तस्मै पुण्यमादाय गच्छति।। (महाभारत)
अर्थ - जिस गृहस्थ के घर से कोई मेहमान यदि बिना सम्मान के चले जाता है तो इसका दुष्प्रभाव निकट भविष्य में उसे भुगतना पड़ता है। ऐसा अतिथि गृहस्थ व्यक्ति को अपना पाप देकर और उसका पुण्य लेकर चला जाता है। इसलिए गृहस्थ लोगों को भूलकर भी कभी अतिथि का निरादार नहीं करना चाहिए। अतिथि जब हमारे पुण्य लेकर जाता है तो निश्चित रूप से हमारे जीवन पर इसका अशुभ प्रभाव होता है।


चाणक्य नीति (chanakya Niti) के अनुसार…
आचार्य चाणक्य ने भी अपनी नितियों में अतिथि के सत्कार के बारे में काफी कुछ लिखा है। चाणक्य नीति के अनुसार, यदि हमारे घर कोई शत्रु भी आ जाए तो उसका पूरी तरह से सम्मान करना चाहिए। जितनी देर वह व्यक्ति घर में रहे, उससे मित्रतापूर्वक ही व्यवहार करना चाहिए। इससे संभव है कि वह आपका मित्र बन जाए। ऐसा न भी हो तो उसके मन में आपके प्रति शत्रुता का जो भाव है, उसमें कमी आ सकती है।


श्रीमद्भागवत (Shrimad Bhagwat) के अनुसार…
श्रीमद्भागवत के अनुसार, हर व्यक्ति में परमात्मा का अंश है। इस बात को सच माना जाए तो घर आया व्यक्ति भी उस परम पिता परमेश्वर का अंश स्वरूप ही है। इसलिए कहा जाता है कि घर आए मेहमान का स्वागत-सत्कार अतिथि मानकर नहीं बल्कि देवता मानकर करना चाहिए। जो लोग ऐसा नहीं करते वे अप्रत्यक्ष रूप से भगवान का अपमान करते हैं। भगवान का अपमान भविष्य में हमारे लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इसलिए घर आए मेहमान के स्वागत-सत्कार में कोई कमी नहीं रखनी चाहिए।


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