जहां आज तक रात नहीं रूके बड़े नेता-मंत्री, MP के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वहां बिताई रात, तोड़ा सैकड़ों साल पुराना मिथक

Published : Dec 17, 2023, 10:56 AM IST
mohan yadav chief minister MP

सार

Madhya Pradesh Chief Minister Mohan Yadav: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अपनी कार्यशैली के चलते पहले ही दिन से सुखिर्यों में हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद वे पहली बार अपने गृह नगर उज्जैन पहुंचे तो वहां उन्होंने सैकड़ों साल पुराना मिथक तोड़ दिया। 

उज्जैन. मध्य प्रदेश के नवनियुक्त मुख्यमंत्री मोहन यादव पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार 16 दिसंबर को अपने गृह नगर उज्जैन आए। यहां नगर वासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन में ही रात बिताई और इसी के साथ सैकड़ों साल पुराने मिथक को भी तोड़ दिया कि उज्जैन में कोई भी बड़ा मंत्री या नेता रात नहीं गुजार सकता। आगे जानिए क्या है ये मिथक और इससे जुड़ी खास बातें…

क्या है उज्जैन से जुड़ा मिथक? (What is the myth related to Ujjain?)
उज्जैन मध्य प्रदेश का एक धार्मिक शहर है, यहां 12 ज्योतिर्लिगों में से एक महाकालेश्वर स्थित है। मान्यता है कि महाकाल ही उज्जैन के राजा हैं, उनके अलावा और कोई भी बड़ा नेता या मंत्री यहां रात नहीं गुजार सकता, ऐसा होने पर उसके साथ कोई अनहोनी घटना होने की भय रहता है। यही कारण है कि उज्जैन में आज भी कोई बड़ा नेता या मंत्री रात नहीं रूकता।

कैसे शुरू हुआ ये मिथक?
लोक कथाओं के अनुसार, उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के काल में जो भी राजा बनता था, अगर वो रात शहर की सीमा मे गुजारता था तो उसकी मृत्यु हो जाती थी। इसलिए यहां के राजाओं ने शहर से दूर अपने लिए महल बनवाएं। शहर से 7 किमी दूर कालियादेह महल आज भी इसका प्रमाण है जिसे सिंधिया शासकों ने बनवाया था।

क्या कहते हैं विद्वान?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के उज्जैन में रात रूकने की बात पर विद्वानों का कहना है कि चूंकि वे इसी शहर के निवासी हैं और महाकाल के भक्त भी हैं, इसलिए वे एक सामान्य जन के रूप में यहां रात रूक सकते हैं। शहर के निवासियों पर ये नियम लागू नहीं होता इसलिए मुख्यमंत्री यादव बिना संकोच से अपने गृह नगर उज्जैन में रात रूक सकते हैं।

क्या कहा मुख्यमंत्री यादव ने?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस विषय पर कहा कि ‘उज्जैन के राजा तो सिर्फ बाबा महाकाल हैं और मैं उनका एक सेवक हूं। मैं राजा नहीं बाबा महाकाल के भक्त के रूप में यहां आगे भी रूकता रहूंगा।’


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