Mahabharat Interesting Facts: ब्राह्मणों को किसने दिया था ‘शराब’ से जुड़ा ये भयानक श्राप?

Published : Jun 22, 2024, 03:34 PM IST
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सार

Mahabharat facts: महाभारत में अनेक रोचक बातें बताई गई हैं, जिनके बारे में कम ही लोगों को पता है। इस महाग्रंथ में दैत्य गुरु शुक्राचार्य की कथा का वर्णन भी मिलता है। शुक्राचार्य ने ही ब्राह्मणों को एक श्राप भी दिया था। 

Katch Aour Devyani Ki Katha: महाभारत की कथा जितनी विस्तृत है, उनकी ही रोचक और विचित्र भी है। महाभारत के आदि पर्व में ही इसमें दैत्य गुरु शुक्राचार्य से जुड़ी एक कथा का वर्णन मिलता है। ये कथा बहुत ही प्रचलित है। इस कथा के अंत में शुक्राचार्य ब्राह्मणों को शराब से जुड़ा एक श्राप देते हैं। बहुत ही लोगों को इस श्राप के बारे में जानकारी है। आगे जानिए क्या है दैत्य गुरु शुक्राचार्य से जुड़ी ये कथा…

देवता और असुरों में होते थे युद्ध
महाभारत के अनुसार, स्वर्ग पर अधिकार के लिए देवता व असुरों में निरंतर युद्ध होता रहता था। असुरों के गुरु शुक्राचार्य संजीवनी विद्या जानते थे। इसलिए वे मरे हुए असुरों को पुनर्जीवित कर देते थे, लेकिन देवताओं के गुरु बृहस्पति को उस विद्या का ज्ञान नहीं था। इसलिए देवताओं का पक्ष कमजोर होता जा रहा था।

देवताओं ने चली चाल
जब देवताओं ने देखा कि शुक्राचार्य संजीवनी विद्या के सहारे मृत असुरों को पुन: जीवित कर देते हैं तो उन्होंने गुरु बृहस्पति के पुत्र कच को शुक्राचार्य के पास उस विद्या को सीखने के लिए भेजा। शुक्राचार्य ने बिना सोचे-समझें ही कच को अपना शिष्य बना लिया और ज्ञान देने लगे।

असुरों ने कर दिया कच का वध
जब असुरों को पता चला कि कच का उद्देश्य शुक्राचार्य से संजीवनी विद्या सीखना है, तो उन्होंने कच को मार कर उसका शव भेड़ियों को खिला दिया। शुक्राचार्य ने संजीवनी विद्या से उसे पुनर्जीवित कर दिया। तब असुरों ने कच को जलाकर उसकी राख शराब में मिला कर शुक्राचार्य को पिला दी।

शुक्राचार्य ने कच को दिया संजीवना विद्या का ज्ञान
जब शुक्राचार्य को असुरों की इस हरकत के बारे में पता चला तो उन्होंने पेट में ही कच को संजीवनी विद्या का ज्ञान दिया। जिससे कच शुक्राचार्य का पेट फाड़ कर बाहर आ गए और संजीवनी विद्या से अपने गुरु शुक्राचार्य को पुनर्जीवित कर दिया।

गुरु शुक्राचार्य ने दिया ब्राह्मणों को श्राप
गुरु शुक्राचार्य ब्राह्मण थे, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने शराब पी थी। जिसके कारण वे असुरों की चाल को समझ नहीं पाए। शुक्राचार्य ने उसी समय ब्राह्मणों को श्राप दिया कि यदि वे किसी भी रूप में शराब का सेवन करेंगे तो उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगेगा।


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