द्रौपदी के अलावा कौन थीं अर्जुन की 3 पत्नियां? इनमें से एक थी ‘नागकन्या'

Published : Sep 10, 2024, 01:30 PM IST
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सार

mahabharat interesting facts: महाभारत में अर्जुन सबसे प्रमुख पात्रों में एक था। अर्जुन की 2 पत्नी द्रौपदी और सुभद्रा के बारे में सभी जानते हैं और इनके अलावा अर्जुन की 2 पत्नी और थी, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। 

Arjun Ki Kitni Patni Thi: महाभारत में अनेक महत्वपूर्ण पात्र हैं, इनमें से अर्जुन भी एक है। अर्जुन से जुड़ी कईं ऐसी रोचक बातें हैं, जिनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है जैसे उनकी पत्नियों के बारे में। आमतौर पर सभी लोग अर्जुन की सिर्फ 2 पत्नी द्रौपदी और सुभद्रा के बारे में जानते हैं। इनके अलावा भी अर्जुन की 2 अन्य पत्नी थी, जिनके बारे में कमी ही लोगों को जानकारी है। आगे जानिए अर्जुन की पत्नियों से जुड़ी रोचक बातें...

पहली पत्नी थी द्रौपदी
महाभारत के अनुसार, कुंती पुत्र अर्जुन की पहली पत्नी द्रौपदी थी, जिसे उन्होंने स्वयंवर में जीता था। बाद में द्रौपदी पांचों पांडवों की पत्नी कहलाई। द्रौपदी का जन्म मां के गर्भ से नहीं बल्कि यज्ञ की अग्नि से हुआ था, इसलिए इनका एक नाम यज्ञसेनी भी था। द्रौपदी इंद्र की पत्नी इंद्राणी का अवतार थीं। द्रौपदी के पिता द्रुपद पांचाल देश के राजा थे, इसलिए द्रौपदी का एक नाम पांचाली भी था।

दूसरी पत्नी थी सुभद्रा
अर्जुन की दूसरी पत्नी का नाम है सुभद्रा, जो भगवान श्रीकृष्ण की बहन थीं। श्रीकृष्ण के कहने पर ही अर्जुन ने सुभद्रा का हरण किया था। दरअसल श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम सुभद्रा का विवाह दुर्योधन से करना चाहते थे, इसलिए श्रीकृष्ण ने उसके हरण की योजना बनाई थी। अभिमन्यु सुभद्रा का ही पुत्र था।

तीसरी पत्नी थी उलूपी
एक बार नियम भंग के कारण अर्जुन को 12 वर्ष के वनवास पर जाना पड़ा। वनवास के दौरान एक दिन जब अर्जुन गंगा में स्नान कर रहे थे,उसी समय नागकन्या उलूपी ने मोहित होकर उन्हें जल के भीतर खींच लिया। उलूपी का प्रेम देखकर अर्जुन ने उससे विवाह कर लिया। कुछ दिन नागलोक में रुकने के बाद अर्जुन पुनः वनवास पर चले गए।

चौथी पत्नी थीं चित्रांगदा
12 वर्ष के वनवास में घूमते-घू्मते अर्जुन एक दिन मणिपुर पहुंच गए। वहां के राजा चित्रवाहन थे। उनकी कन्या का नाम चित्रांगदा था। चित्रांगदा को देखकर अर्जुन ने राजा चित्रवाहन के पास गए और उन्हें अपना परिचय देकर उनकी कन्या से विवाह का प्रस्ताव रखा। राजा चित्रवाहन ने खुशी-खुशी चित्रांगदा का विवाह अर्जुन से करवा दिया। चित्रांगदा के पुत्र का नाम बभ्रुवाहन था, जो बाद में मणिपुर का राजा बना।


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