Nag Panchami 2025: कौन हैं नागों की बहन, क्यों कहलाती हैं महादेव की पुत्री?

Published : Jul 29, 2025, 10:40 AM IST
mansa mata nah panchami

सार

Nag Panchami Interesting Facts: धर्म ग्रंथों में नागों से जुड़ी अनेक कथाएं हैं। महाभारत के अनुसार नागों की एक बहन भी है, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। नागों की बहन की कथा भी बहुत रोचक है। जानें कौन हैं नागों की बहन?

Interesting stories related to snakes in Hinduism: 29 जुलाई, मंगलवार को नाग पंचमी है। नागों से जुड़ी अनेक कथाएं धर्म ग्रंथों में मिलती है जैसे नागों की उत्पत्ति कैसे हुई, नागों का राजा कौन है आदि। लेकिन नागों की बहन के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। महाभारत में नागों की बहन की रोचक कथा बताई गई है। कुछ धर्म ग्रंथों में नागों की बहन को शिवजी की पुत्री भी कहा गया है। आगे जानें नागों की बहन से जुड़ी रोचक कथा…

कौन हैं नागों की बहन?

महाभारत के अनुसार महर्षि कश्यप की 13 पत्नियां थीं। इनमें से एक का नाम कद्रू था। कद्रू ने अपने पति की बहुत सेवा की। प्रसन्न होकर महर्षि कश्यप ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। कद्रू ने वरदान मांगा ‘एक हजार शक्तिशाली सर्प मेरे पुत्र हों।’ महर्षि कश्यप ने उन्हें ये वरदान दे दिया। इस वरदान से कद्रू ने शेषनाश, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक आदि शक्तिशाली नागों को जन्म दिया। साथ ही एक नाग कन्या को, जिसका नाम जरत्कारू रखा गया। जरत्कारू का ही दूसरा नाम मनसा देवी है।

कैसे हुआ नागों की बहन मनसा का विवाह?

एक बार किसी बात पर क्रोधित होकर नागों की माता कद्रू ने अपने ही पुत्रों को नागदाह यज्ञ में जलकर भस्म हो जाने का श्राप दे दिया। तब एलापात्र नाम के एक नाग ने नागराज वासुकि से कहा कि हमारी बहन जरत्कारू का पुत्र ही हमें इस संकट से बचा सकता है। तब नागराज वासुकि ने अपनी बहन जरत्कारू का विवाह उन्हीं के नाम के एक ऋषि जरत्कारू से करवा दिया जिससे एक पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम आस्तिक था।

कैसे रुका राजा जनमेजय का नागदाह यज्ञ?

जब राजा जनमेजय ने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए नागदाह यज्ञ करवाया तो उसमें बड़े-बड़े नाग आ-आकर गिरने लगे। ये देख नागराज वासुकि अपनी बहन मनसा के पास गए और उन्हें पूरी बात पताई। मनसा देवी ने अपने पुत्र आस्तिक को नागदाह यज्ञ रुकवाने के लिए भेजा। आस्तिक मुनि ने यज्ञ की प्रशंसा कर राजा जनमेजय को प्रसन्न किया और अंत में उनसे ये यज्ञ बंद करने को कहा। आस्तिक मुनि के कहने पर नागदाह यज्ञ रुक गया और नाग वंश का अंत होने से बच गया।

मनसा देवी को क्यों कहते हैं महादेव की पुत्री?

कुछ धर्म ग्रंथों में मनसा देवी को महादेव की मानस पुत्री कहा गया है। इसके पीछे ये कारण कारण ही मनसा देवी को स्वयं भगवान शिव के शिक्षा दी है। मनसा देवी महादेव की शिष्या हैं और शिष्या को पुत्री के समान ही माना गया है। इसलिए मनसा देवी को महादेव की मानस पुत्री भी कहा जाता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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