Pitru dosh kya hota hai: पितृ दोष के बारे में हम सभी ने जरूर सुना होगा, इसे ही प्रेत दोष भी कहते हैं। ये क्या होता है, कैसे हमें प्रभावित करता है? इसके बारे में कम ही लोगों को पता है। आगे जानिए पितृ दोष के संकेत और उपाय से के साथ पूरी डिटेल।
Pitru dosh kyo hota hai: इस बार पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू हो चुका है जो 21 सितंबर तक रहेगा। पितृ पक्ष के दौरान बहुत से लोग पितृ दोष के उपाय विशेष रूप से करते हैं। गरुड़ पुराण में प्रेत दोष के बारे में बताया गया है, इसे ही पितृ दोष भी कहते हैं। आखिर पितृ दोष होता क्या है, इसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। आगे उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा से जानिए क्या होता है प्रेत या पितृ दोष, कैसे हमारे जीवन को प्रभावित करता है और इसके उपाय…
पूर्व जन्म में हमारे द्वारा पूर्वजों को पहुंचाए गए कष्ट व अपमान के कारण कुछ लोगों को जन्म से ही पितृ दोष होता है। अगर इस जन्म में भी हमारे द्वारा पूर्वजों की शांति के लिए समय-समय पर श्राद्ध, पिंडदान आदि न किए जाए तो पितृ दोष का प्रभाव और भी अधिक हो जाता है, जिसके कारण हमें कईं तरह परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली व हस्तरेखा देखकर भी पितृ दोष के बारे में आसानी से जाना जा सकता है।
पितृ दोष के संकेत क्या हैं? (Pitru Dosh Ke Sanket)
1. जिन लोगों को पितृ दोष होता है, उन्हें यहां संतान पैदा नहीं होती और अगर होती है तो बीमार रहती है या जल्दी ही उसकी मृत्यु हो जाती है। 2. पितृ दोष के कारण घर का कोई न कोई सदस्य अक्सर बीमार रहता है। कईं बार ये बीमारी जानलेवा भी हो सकती है 3. जिन लोगों को पितृ दोष होता है, उनकी शादी होने में कई प्रकार की समस्याएं आती हैं। कुछ लोगों को तो शादी भी नहीं होती, जिसके कारण इनका वंश ही आगे नहीं बढ़ पाता। 4. सपने में बार-बार पितृ या सांप का दिखाई देना भी पितृ दोष का ही एक संकेत है। 5. पैतृक संपत्ति के लिए परिवार में विवाद होना, हत्या होना भी पितृ दोष का ही संकेत समझना चाहिए।
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पितृ दोष के उपाय (Pitru Dosh Ke Upay)
1. श्राद्ध पक्ष के दौरान किसी तीर्थ स्थान पर पितरों की शांति के लिए पूजा करवाएं। 2. हर महीने की अमावस्या तिथि पर पितरों का तर्पण-श्राद्ध करें। 3. जरूरतमंदों को भोजन, कपड़ा, अनाज आदि चीजों का दान करें। 4. गाय को हरा चारा खिलाएं, कुत्ते को रोटी दें और पशु-पक्षियों के लिए छत पर अनाज व पानी रखें। 5. नियमित रूप से रोज पितृ स्तोत्र का पाठ करें। 6. तांबे के लोटे में काले तिल मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें और पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें। 7. पितरों की शांति के लिए श्रीमद्भागवत का पाठ अपने घर में करवाएं।
Disclaimer इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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