पितृ पक्ष: गया के अलावा इन 5 पवित्र जगहों पर भी करें श्राद्ध, पितरों को मिलेगा मोक्ष

Published : Sep 11, 2025, 12:59 PM IST
पितृ पक्ष

सार

पितृ पक्ष, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए गया सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थल है, लेकिन हरिद्वार, काशी, प्रयागराज, बद्रीनाथ और रामेश्वरम जैसे अन्य तीर्थस्थलों का भी विशेष महत्व है। यहां पितरों को मोक्ष मिलता है।

Pitru Paksha Shradh Famous Places: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस समय श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए हर साल पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। आपको बता दें कि इस साल पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू हो चुका है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से अमावस्या तक चलने वाला यह काल पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए समर्पित है। वहीं, पितृ पक्ष का नाम आते ही सबसे पहले गयाजी की चर्चा होती है। बिहार के गया में इस दौरान हर साल एक भव्य मेला लगता है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आते हैं और अपने पितरों के लिए पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि गयाजी में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनकी आत्मा तृप्त होती है। लेकिन अगर किसी कारणवश आप गयाजी नहीं जा पा रहे हैं, तो आप इन प्रसिद्ध स्थानों पर भी श्राद्ध कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं उन स्थानों के बारे में...

हरिद्वार का महत्व

हरिद्वार को 'हरि का द्वार' कहा जाता है। यहां गंगा नदी में स्नान और श्राद्ध का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि गंगा तट पर बैठकर पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

काशी अर्थात वाराणसी

काशी भगवान शिव की नगरी है और इसे मोक्षदायिनी भी कहा जाता है। यहां गंगा घाटों पर श्राद्ध करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि वाराणसी में पिंडदान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

प्रयागराज संगम

प्रयागराज को 'तीर्थराज' कहा जाता है। यहां गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम है। ऐसे में मान्यता है कि संगम तट पर श्राद्ध करने से पापों से मुक्ति मिलती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

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बद्रीनाथ

उत्तराखंड स्थित बद्रीनाथ धाम में 'ब्रह्मकपाल' नामक घाट है। यहां पिंडदान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि बद्रीनाथ में एक बार पिंडदान करने के बाद दोबारा पिंडदान करने की आवश्यकता नहीं होती।

रामेश्वरम

तमिलनाडु के रामेश्वरम को 'दक्षिण की काशी' कहा जाता है। यहां समुद्र में स्नान और श्राद्ध करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि भगवान राम ने भी यहां अपने पूर्वजों का श्राद्ध किया था।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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