‘मैं माँस-मछली का बिजनेस करता हूं पर खाता नहीं हूं, क्या ये सही है? जरूर सुनिए प्रेमानंद महाराज का जवाब

Published : Apr 27, 2024, 02:42 PM IST
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सार

Premanand Maharaj of Vrindavan: वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज से मिलने रोज हजारों लोग आते हैं। इनमें से कुछ ही लोग उनसे मिल पाते हैं। ये लोग महाराज श्री के सामने अपने प्रश्न पूछते हैं, जिनका उचित जवाब भी इन्हें मिलता है। 

Premanand Maharaj of Vrindavan: वर्तमान में वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज के वीडियो आए दिन सोशल मिडिया पर वायरल होते रहते हैं। बाबा द्वारा कहीं गईं बातें लाइफ मैनजमेंट टिप्स की तरह होती है। प्रतिदिन हजारों लोग बाबा से मिलने आते हैं, इनमें कुछ ही लोग उनसे मिल पाते हैं। इन लोगों के मन में कईं तरह की शंका-कुशंकाएं होती हैं। महाराज श्री इन शंका-कुशंकाओं का निवारण करके उन्हें सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। इन दिनों बाबा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें मांस-मछली बेचने वाला एक व्यक्ति अपने सवाल पूछ रहा है। जानें क्या है इस वीडियो में…

भक्त ने पूछा सवाल
वीडियो में दिखाई दे रहा है कि एक व्यक्ति महाराज श्री से सवाल पूछ रहा है कि ‘महाराज, मैं रोज सुबह उठकर राधा नाम जप करता हूं पर कभी-कभी मेरा मन अशांत हो जाता हूं क्योंकि मेरा व्यापार पूर्व से ही मांस-मछली से संबंधित रहा है। मैं मांस-मछली का सेवन तो नहीं करता, लेकिन व्यापार करता हूं। इससे भगवद प्राप्ति में बाधा तो नहीं होगी?’

क्या कहा बाबा ने?
महाराज जी ने कहा कि ‘आप यदि मांस-मछली के व्यापार से जुड़े हैं तो आपको उसका फल तो भोगना ही पड़ेगा। क्या व्यापार सिर्फ जीव हत्या वाला ही है, क्या आप दूसरा कोई व्यापार नहीं कर सकते? यदि आपका जन्म ऐसे परिवार में हुआ है जहां आपकी कुल परंपरा में ये बिजनेस आपको मिला है तो हम आपको प्रणाम करते हैं कि आपको सत्संग सुनने की रुचि जागी।’

प्रेमानंद बाबा ने कही ये बात
महाराज श्री ने कहा कि ‘यदि आपकी कुल परंपरा में मांस-मछली का बिजनेस नहीं है तो इसे छोड़ दीजिए क्योंकि जीव हत्या से जुड़ा व्यापार करने से कभी किसी को शांति नहीं मिलती। आप जो गलत कर रहे हैं, उससे आपका मन जल रहा है यही भजन का प्रभाव होता है। जब आपके लिए ये काम असहनीय हो जाए तो फिर इसे छोड़ दीजिए।’

कैसे होगा भरण पोषण?
प्रेमानंद बाबा ने कहा कि ‘ये चिंता मत करना कि आपका और परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा? भगवान का नाम विश्व का भरण-पोषण करने वाला विशंभर है। कुल 84 लाख योनियां हैं, भगवान सबका भरण पोषण करते हैं। अगर आप अपने काम से खुश नहीं है तो भले ही मजदूरी कर लो, उसी से अपने परिवार का भरण-पोषण कर लो। ऐसा करने से भले ही 4 दिन आपको दुख देखना पड़े लेकिन बाद में मन को शांति मिलेगी।’


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