राम मंदिर अयोध्या: जानें क्या है प्राण प्रतिष्ठा, जिसके बाद मूर्ति बन जाती है भगवान

Published : Jan 22, 2024, 02:21 PM IST
ramlala

सार

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आज यानी 22 जनवरी को संपन्न हुआ। अब 23 जनवरी से आम लोग भी राम लला के दर्शन कर सकेंगे। आज अयोध्या में अभिजीत मुहूर्त पर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। 

अयोध्या.अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम आज यानी 22 जनवरी को संपन्न हुआ। अब 23 जनवरी से आम लोग भी राम लला के दर्शन कर सकेंगे। आज अयोध्या में अभिजीत मुहूर्त पर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। लेकिन क्या आपको पता है कि प्राण प्रतिष्ठा क्या है, जिसके बाद पत्थर या किसी धातु की बनी मूर्ति भगवान का रूप धारण कर लेती है।

प्राण-प्रतिष्ठा क्या है और क्यों जरूरी

सनातन धर्म के मुताबिक, किसी भी मंदिर में देवी या देवता की प्रतिमा स्थापित करने से पूर्व मूर्ति की पूजा-अर्चना कर प्राण-प्रतिष्ठा करना जरूरी है। प्राण-प्रतिष्ठा का अर्थ होता है प्रतिमा में प्राणों की स्थापना करना या मूर्ति को देवी या देवता के रूप में बदलना। धार्मिक ग्रंथों में प्राण-प्रतिष्ठा का वर्णन किया गया है। बिना प्राण-प्रतिष्ठा के किसी भी मूर्ति की पूजा नहीं की जाती है। प्राण-प्रतिष्ठा के पूर्व मूर्ति निर्जीव मानी जाती है। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद मूर्ति को सजीव माना जाता है। इस प्रक्रिया के बाद प्रतिमा पूजने योग्य बन जाती है।

प्राण-प्रतिष्ठा कैसे की जाती है

किसी भी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए कई चरण होते हैं। इन चरणों को अधिवास कहते है। अधिवास में मूर्ति को अलग-अलग चीजों में डुबोया जाता है। सबसे पहले प्रतिमा को पानी में रखा जाता है। इसके बाद अनाज में रखा जाता है। प्राण-प्रतिष्ठा को फलों में रखा जाता है।अगले अधिवास में मूर्ति को औषधि, केसर और घी में रखा जाता है। इन सारी प्रक्रिया के बाद मूर्ति का स्नान कराया जाता है। स्नान के बाद अभिषेक किया जाता है। अब कई तरह के मंत्रोच्चारण के बाद देव को जगाया जाता है। 

इसके बाद से प्राण-प्रतिष्ठा के लिए पूजन शुरू होता है। पूजन के समय मूर्ति का मुख पूर्व दिशा में रखा जाता है। इसके बाद समस्त देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है। और सभी देवी और देव आमंत्रित किए जाते है।

ये सभी अधिवास पूरे होने के बाद भगवान को वस्त्र पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद प्रतिमा के बाद आइना दिखाया जाता है। आखिर में आरती कर प्रसाद वितरण का कार्य किया जाता है।

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 84 सेकंड में हुई

देश भर के विद्वानों में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए मुहूर्त निकाला गया। 22 जनवरी यानी पौष माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का योग बना। आज सिद्धि योग, रवि योग, अमृत योग, अमृत सिद्धि योग मृगशिरा नक्षत्र, मेष लग्न और वृश्चिक नवांश का संयोग है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा अभिजीत मुहूर्त में 84 सेकंड के भीतर संपन्न हुई।

 

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