Sawan 2025: क्या शिवजी के अवतार हैं नंदी, क्यों गर्भगृह से बाहर होती है इनकी प्रतिमा?

Published : Jul 27, 2025, 03:01 PM IST
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सार

Sawan 2025: भगवान शिव की पूजा के दौरान नंदी की पूजा भी जरूर की जाती है, इसलिए हर शिव मंदिर में नंदी की प्रतिमा जरूरी स्थापित की जाती है। नंदी के बिना शिव मंदिर अधूरा माना जाता है। नंदी से जुड़ी कईं कथाएं धर्म ग्रंथों में मिलती हैं।

Interesting stories related to Nandi: भगवान शिव के साथ अगर नंदी की पूजा न की जाए तो उसका पूरा फल नहीं मिलता, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है। इसलिए महादेव के हर मंदिर में नंदी की प्रतिमा जरूर होती है। अनेक भक्त नंदी के कान में अपनी मनोकामना भी बोलते हैं। नंदी शिव के वाहन भी है और अवतार भी। धर्म ग्रंथों में नंदी से जुड़ी अनेक कथाएं पढ़ने को मिलती हैं। सावन मास के इस पवित्र महीने में जानिए जानिए कैसे हुआ नंदी का जन्म, क्यों उनकी प्रतिमा शिव मंदिर में गर्भ गृह से बाहर होती है…

कैसे हुआ नंदी का जन्म?

शिवपुराण में नंदी के जन्म की कथा मिलती है, उसके अनुसार ‘शिलाद नाम के एक ब्रह्मचारी मुनि थे। वंश समाप्त न हो इसके लिए उन्होंने घोर तपस्या करके शिवजी को प्रसन्न किया और अयोनिज और मृत्युहीन पुत्र मांगा। भगवान शिव ने उन्हें ये वरदान दे दिया। एक बार शिलाद मुनि भूमि जोत रहे थे, तब भूमि से उन्हें एक बालक मिला। शिलाद मुनि ने उसका नाम नंदी रखा। स्वयं महादेव ने अपने एक अंश से शिलाद मुनि के पुत्र नंदी के रूप में अवतार लया था। नंदी भी परम शिव भक्त थे। प्रसन्न होकर शिवजी ने नंदी का अपना गणाध्यक्ष बना दिया।

गर्भगृह के बाहर क्यों होती है नंदी की प्रतिमा?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, जब भगवान शिव की पत्नी देवी सती ने राजा दक्ष के यज्ञ में कूदकर आत्मदाह कर लिया तो महादेव बैरागी हो गए और एक गुफा में तपस्या करने चले गए। ये तपस्या कईं हजार साल चलती रही, इस दौरान नंदी ने गुफा के बाहर बैठकर अपने आराध्य महादेव का इंतजार किया। गर्भगृह को उस गुफा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए नंदी की प्रतिमा इसके बाहर महादेव के ठीक सामने स्थापित की जाती है।

नंदी के कान में क्यों बोलते हैं मनोकामना?

अक्सर आपने देखा होगा कि अनेक भक्त नंदी के कान में अपनी मनोकामना बोलते हैं। इसके पीछे एक मनोवैज्ञानिक पक्ष है। कहते हैं कि महादेव सदैव तपस्या में रहते हैं। इस स्थिति में वे भक्तों की बात नहीं सुन पाते। इसलिए भक्त नंदी के कान में अपनी मनोकामना बोलते हैं ताकि महादेव जब तपस्या से उठे तो वे भक्तों की बात महादेव को बता सके।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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