30 दिसंबर को अमावस्या पर करें 10 मिनिट का उपाय, दूर होंगी पितृ दोष की परेशनियां

Published : Dec 30, 2024, 09:04 AM IST
somwati amawasya 2024

सार

Somwati Amawasya December 2024: साल 2024 के अंतिम सोमवार को अमावस्या का संयोग बन रहा है। जिस व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है यदि वो इस दिन कुछ खास उपाय करे तो उसकी परेशानियां कुछ कम हो सकती हैं। 

Somwati Amawasya Upay: 30 दिसंबर, सोमवार को पौष मास की अमावस्या है। सोमवार को अमावस्या होने से ये सोमवती अमावस्या कहलाएगी। सोमवती अमावस्या का महत्व अन्य अमावस्या से कहीं अधिक माना गया है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है वे यदि इस दिन कुछ खास उपाय करें तो उनकी परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं साथ ही पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है। अमावस्या तिथि पर पितृ स्त्रोत का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। जानें पितृ स्त्रोत का पाठ कैसे करें…

ये है पितृ स्त्रोत

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान्।।
मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा।
तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि।।
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान्।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि:।।
प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।
नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे।।
सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम्।।
अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम्।
अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत:।।
ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण:।।
तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:।
नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज।।

कैसे करें पितृ स्त्रोत का पाठ?

- सोमवती अमावस्या के दिन किसी भी समय स्नान आदि करने के बाद घर में ही पितृ स्त्रोत का पाठ किया जा सकता है।
- एक उपला जिसे कंडा भी कहते हैं, का एक टुकड़ा जलाकर मिट्टी के बर्तन में रख लें। इसके ऊपर घी-गुड़ की आहुति दें।
- आहुति देते समय ऊं पितृ देवताभ्यो नम: मंत्र का जाप करते रहें। 5 बार धूप दें और अंगूठे से जमीन पर जल छोड़ दें।
- इसी स्थान पर बैठकर पितृ स्त्रोत का पाठ करें। ऐसा करने आपकी परेशानियां अपने आप ही दूर हो सकती हैं।


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