Vrishabha Sankranti 2023: 15 मई को सूर्य बदलेगा राशि, खत्म होगा अशुभ योग, शुभ फल के लिए करें ये उपाय

Published : May 13, 2023, 10:05 AM IST
vrishabh sankranti 2023

सार

Vrishabha Sankranti 2023: 15 मई को सूर्य राशि बदलकर मेष से वृषभ में प्रवेश करेगा। सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश करने से ये वृषभ संक्रांति कहलाएगी। धर्म ग्रंथों में इसे पर्व कहा गया है। शुभ फल पाने के लिए इस दिन कुछ खास उपाय करने चाहिए। 

उज्जैन. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य हर 30 दिन में राशि बदलता है। सूर्य के राशि बदलने को धर्म ग्रंथों में संक्रांति कहा गया है। 15 मई को सूर्य मेष से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेगा, इसे वृष संक्रांति (Vrishabha Sankranti 2023) कहा जाएगा। धर्म ग्रंथों में संक्रांति को पर्व कहा गया है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। सूर्य के राशि बदलने से शनि-सूर्य का अशुभ योग भी समाप्त होगा। आगे जानिए क्यों खास रहेगा सूर्य का राशि परिवर्तन…

सूर्य का प्रभाव होगा कम, खत्म होगा अशुभ योग
वर्तमान में सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में है, 15 मई को जब ये वृषभ राशि में आएगा तो इसके शुभ प्रभाव में कमी आएगी। वृषभ सूर्य के शत्रु ग्रह शुक्र की राशि है। सूर्य के राशि बदलने से सूर्य-शनि का अशुभ योग भी समाप्त हो जाएगा। शनि अभी कुंभ राशि में है और सूर्य मेष राशि में। ग्रहों की इस स्थिति से शनि की वक्र दृष्टि सूर्य पर पड़ रही है, 15 मई को जैसे ही सूर्य वृषभ राशि में प्रवेश करेगा, ये अशुभ योग समाप्त हो जाएगा।

होगा ऋतु परिवर्तन, तेज होगा गर्मी का प्रकोप
15 मई को सूर्य के वृषभ राशि में आते ही ऋतु परिवर्तन होगा और ग्रीष्म ऋतु का आरंभ हो जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वृषभ राशि में रहते हुए सूर्य जब कृत्तिका नक्षत्र में होता है, तो धरती पर सूर्य की किरणें ज्यादा देर तक रहती है, जिससे गर्मी का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। इसी राशि में रहते हुए जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा तो नौतपा शुरू हो जाएगा, ये स्थिति 25 मई से बनेगी।

ये उपाय करें…
1. वृषभ संक्रांति पर सूर्यदेव की पूजा करें, तांबे के लोटे में लेकर जल चढ़ाएं।
2. किसी पवित्र नदी में स्नान करें और उसी के जल से सूर्यदेव का नाम लेकर जल अर्पित करें।
3. जरूरतमंदों को अनाज, भोजन, कपड़े, बर्तन आदि चीजों का दान करें।
4. पितरों की कृपा पाने के लिए इस दिन श्राद्ध, पिंडदान आदि भी किए जा सकते हैं।
5. इस दिन किसी योग्य ब्राह्मण को घर बुलाकर भोजन करवाएं और दान-दक्षिणा देकर विदा करें।


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