Easter Sunday 2025: क्यों मनाते हैं ईस्टर संडे, क्या करते हैं इस दिन? जानें इतिहास और रोचक बातें

Published : Apr 16, 2025, 11:47 AM IST
easter sunday 2025

सार

Easter Sunday 2025: हर साल अप्रैल में ईसाी समुदाय के लोग ईस्टर संडे फेस्टिवल मनाते हैं। इस फेस्टिवल से जुड़ी अनेक मान्यताएं और परंपराएं हैं, इसलिए ये बहुत ही खास है। इस फेस्टिवल को प्रभु यीशु के पुनर्जन्म से जोड़कर देखा जाता है। 

Easter Sunday 2025: ईसाई समुदाय के लोग अप्रैल में पवित्र सप्ताह मनाते हैं। इसके अंतर्गत पाम संडे, गुड फ्राइडे, होली सैटरडे और ईस्टर संडे का पर्व मनाया जाता है। ये सभी त्योहार प्रभु यीशु से संबंधित हैं। ईस्टर संडे का पर्व इस बार 20 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा। इसके पहले 18 अप्रैल, शुक्रवार को गुड फ्राइडे और 19 अप्रैल, शनिवार को होली सैटरडे पर्व मनाया जाएगा। ईस्टर संडे का पर्व प्रभु यीशु के दोबारा जीवित होने की खुशी में मनाया जाता है। दुनिया के सभी देशों में जहां ईसाई समुदाय के लोग रहते हैं, वहां ये त्योहार बहुत ही धूम-धाम से मनाते हैं। आगे जानिए ईस्टर से जुड़ी खास बातें…

क्यों खास है ईस्टर संडे?

ईसाई मान्यताओं के अनुसार यीशु भगवान के पुत्र थे। उनका जन्म बेतलेहम (जोर्डन) में हुआ था। यीशु हमेशा लोगों को एक-दूसरे की मदद करने और प्रेम करने का उपदेश देते थे। उनकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए कुछ लोग उनके विरोधी हो गए और झूठे आरोप लगाकर उन्हें सूली पर चढ़ाने की सजा सुनाई गई। सूली पर चढ़ाने के 3 दिन बाद यीशु पुनर्जीवित हो गए। उस दिन रविवार था। तभी से ईस्टर संडे का पर्व मनाया जा रहा है।

क्या करते हैं ईस्टर संडे पर?

ईस्टर संडे के दिन बड़ी संख्या में लोग चर्च में इकट्ठा होते हैं और प्रार्थना में भाग लेते हैं। चर्चों को विशेष रूप से सजाया जाता है। विशेष प्रार्थना के बाद लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं और प्रभु यीशु के उपदेशों को याद करते हैं। ईस्टर पर सजी हुई मोमबत्तियां अपने घरों में जलाना बहुत शुभ माना जाता है। कुल मिलाकर इस दिन लोग प्रभु यीशु के पुनर्जीवित होने की खुशियां मनाते हैं।

कैसे पुनर्जीवित हुए प्रभु यीशु?

ईसाई मान्यताओं के अनुसार, शुक्रवार को प्रभु यीशु को सूली पर चढ़ाया गया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद चमत्कारी रूप से उनका शरीर गायब हो गया। इसके 2 दिन बाद यानी रविवार को मरियम मगदलीनी नामक महिला ने प्रभु यीशु को जीवित अवस्था में देखा। उसने अन्य लोगों को भी इसके बारे में बताया। इसलिए ईस्टर संडे का पर्व पर्व सुबह सवेरे महिलाओं के द्वारा ही आरंभ होता है।


 

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