Unique Ganesh Temples: 5 अनोखे मंदिर, 3 आंख और मानव मुख वाले गणपति खास, श्मशान गणेश तंत्र-मंत्र के लिए प्रसिद्ध

Published : Sep 19, 2026, 12:26 PM IST

famous Ganesh temples in India: इन दिनों पूरे देश में गणेश उत्सव की धूम है। प्रमुख गणेश मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। कुछ गणेश मंदिर अपने आप में बहुत ही खास हैं। इनका इतिहास भी काफी पुराना है।

PREV
16
भारत के 5 यूनिक गणेश मंदिर

Ganesh Chaturthi 2026: भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत गणेश पूजा से करने की परंपरा है। देशभर में भगवान गणेश के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन इनमें से कुछ मंदिर अपनी खास मान्यताओं और अनोखी परंपराओं के कारण अलग पहचान रखते हैं। गणेश उत्सव के दौरान इन गणेश मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। आगे जानिए भारत के ऐसे ही 5 अनोखे गणेश मंदिरों के बारे में…

26
उज्जैन में है श्मशान वाले गणेश

मध्य प्रदेश के उज्जैन में भगवान गणेश का एक ऐसा मंदिर है, जो अपनी अनोखी स्थिति और प्रतिमा के कारण प्रसिद्ध है। यह मंदिर श्मशान क्षेत्र में स्थित है और यहां भगवान गणेश की 10 भुजाओं वाली प्रतिमा विराजमान है। इसी वजह से इन्हें 10 भुजा गणेश कहा जाता है। श्मशान में स्थित होने से लोग इन्हें तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए विशेष मानते हैं।

36
यहां मानव मुख वाले गणेश की होती है पूजा

तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले के कूथनूर में स्थित श्री आदि विनयगर मंदिर भगवान गणेश के अनोखे स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। यहां गणेशजी की प्रतिमा सामान्य रूप से हाथी के मुख वाली नहीं है, बल्कि उनका चेहरा मानव रूप में दिखाई देता है। इस स्वरूप को नार मुख विनायक कहा जाता है। मान्यता के अनुसार यह भगवान गणेश का वह स्वरूप है, जो उन्हें हाथी का सिर प्राप्त होने से पहले का माना जाता है।


ये भी पढ़ें-
Famous Ganesha Temple: थाईलैंड से इंडोनेशिया तक, विदेश में मौजूद हैं गणपति के ये प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर

46
राजस्थान में तीन आंखों वाले गणेश

राजस्थान के रणथंभौर में स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर भगवान गणेश के अनोखे स्वरूप के लिए जाना जाता है। यहां गणेशजी की प्रतिमा में तीन नेत्र दिखाई देते हैं, इसलिए इन्हें त्रिनेत्र गणेश कहा जाता है। यह मंदिर करीब 700 साल पुराना बताया जाता है। यहां भगवान गणेश के साथ उनकी पत्नी रिद्धि-सिद्धि, पुत्र शुभ-लाभ और वाहन मूषक की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1299 में राजा हम्मीरदेव ने करवाया था।


ये भी पढ़ें-
घर में विराजे हैं बप्पा और जाना पड़ गया बाहर? गणपति को अकेला छोड़ने से पहले जान लें ये नियम

56
लगातार बढ़ रहा है इस गणेश प्रतिमा का आकार

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित कनिपकम श्री वरसिद्धि विनायक स्वामी मंदिर भी अपनी विशेष मान्यता के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान गणेश की प्रतिमा के बारे में मान्यता है कि यह जमीन से स्वयं प्रकट हुई थी। मान्यता के अनुसार इस प्रतिमा का आकार लगातार बढ़ रहा है। मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में चोल सम्राट कुलोत्तुंग प्रथम ने करवाया था।

66
3 हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजे गणपति

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में भगवान गणेश का प्रसिद्ध ढोलकल गणपति मंदिर है। यह मंदिर समुद्र तल से करीब 3 हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर है। यहां भगवान गणेश की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है, जिसे करीब 1 हजार साल पुराना माना जाता है। मान्यता है कि नागवंशी राजाओं के समय 10वीं-11वीं शताब्दी के दौरान इस प्रतिमा की स्थापना हुई थी। ढोलकल गणपति को दंतेवाड़ा का रक्षक भी माना जाता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Photos on

Recommended Stories