Ganpati Sthapana Niyam: गणेश उत्सव के दौरान बप्पा की प्रतिमा स्थापित कर क्या घर में ताला लगाकर बाहर जा सकते हैं? जानें नियम, इमरजेंसी में पूजा-भोग का सही तरीका।

Ganpati Sthapana Home Rituals: गणेश उत्सव की धूम चारों तरफ है। आम लोगों से लेकर बड़े-बड़े फिल्मी सितारे और नेता-मंत्री तक अपने घरों में बप्पा का स्वागत पूरे उत्साह के साथ करते नजर आ रहे हैं। इस साल ये पावन पर्व सोमवार, 14 सितंबर से शुरू होकर शुक्रवार, 25 सितंबर यानी अनंत चतुर्दशी तक पूरे भक्ति भाव से मनाया जा रहा है। घर में गणपति बप्पा के आते ही माहौल में एक अलग ही पॉजिटिव एनर्जी आ जाती है। लेकिन इसी बीच कई परिवारों के सामने एक बड़ा सवाल आता है, 'क्या गणेश स्थापना के बाद घर पर ताला लगाकर बाहर जाया जा सकता है?' आइए जानते हैं शास्त्र और जानकार क्या कहते हैं...

शास्त्र क्या कहते हैं?

हमारे शास्त्रों में कहा गया है, 'अतिथि देवो भवः' यानी अतिथि भगवान हैं। जब हम गणेश जी की स्थापना करते हैं, तो उन्हें सिर्फ एक मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपने सबसे प्रिय अतिथि और परिवार के मुखिया के रूप में आमंत्रित करते हैं। शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, जैसे हम अपने घर आए किसी खास मेहमान को अकेले कमरे में बंद करके बाहर नहीं जाते, ठीक वैसे ही बप्पा को घर में अकेला छोड़कर ताला लगाना सही नहीं माना जाता है।

गणेश उत्सव के दौरान घर से बाहर जाने से क्या होगा?

भगवान गणेश की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद उनकी दोनों समय आरती, भोग और सेवा जरूरी होती है। ताला लगाने से पूजा-पाठ का ये क्रम टूट जाता है। कई घरों में उत्सव के दौरान अखंड ज्योत जलाई जाती है। ऐसे में सुरक्षा और धार्मिक दोनों नियमों के लिहाज से घर में किसी न किसी का रहना जरूरी होता है।

अगर बाहर जाना बेहद जरूरी हो तो क्या करें?

परिवार का कोई एक सदस्य रुके

जिंदगी में कई बार इमरजेंसी आ जाती है या ऑफिस के जरूरी काम से बाहर जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में दोष से बचने के लिए कोशिश करें कि परिवार के सभी लोग एक साथ ताला लगाकर न जाएं। कोई एक व्यक्ति घर पर रहे जो समय पर भोग और दीपक लगा सके।

जिम्मेदारी किसी अपने को सौंपें

अगर पूरे परिवार को ही जाना पड़े, तो घर की चाबी किसी भरोसेमंद रिश्तेदार या पड़ोसी को सौंप दें। उनसे कहें कि वे सुबह-शाम आकर बप्पा की आरती करें और ताजे फल या मोदक का भोग लगाएं।

कम दिनों का संकल्प लें

अगर आपको पहले से पता है कि 10 दिन रुकना मुमकिन नहीं होगा, तो गणपति बप्पा को पूरे 10 दिन बैठाने के बजाय डेढ़ दिन, 3 दिन या 5 दिन का संकल्प लें और विधिवत विसर्जन के बाद ही यात्रा पर जाएं।

हाथ जोड़तर क्षमा मांगे

गणेश जी तो 'विघ्नहर्ता' और 'भाव के भूखे' हैं। वे बाहरी आडंबर से ज्यादा मन की सच्ची भक्ति देखते हैं। अगर मजबूरी में बाहर जाना ही पड़े, तो बप्पा से हाथ जोड़कर क्षमा मांगें और मानसिक रूप से उनका स्मरण करते रहें।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, लोक परंपराओं और शास्त्रों में वर्णित सामान्य नियमों पर आधारित है। ये सिर्फ सामान्य जनरुचि और पाठकों की जानकारी के उद्देश्य से पब्लिश की गई है। किसी भी नियम, पूजा विधि या अनुष्ठान को लेकर अपनी पारिवारिक परंपराओं, स्थानीय रीति-रिवाजों या किसी योग्य ज्योतिषी या पंडित की सलाह को प्राथमिकता दें।