Vamana Jayanti 2026: कब है वामन जयंती, 23 या 24 सितंबर? जानें पूजा की विधि, मंत्र, मुहूर्त सहित पूरी डिटेल

Published : Sep 22, 2026, 09:33 AM IST
Vamana Jayanti 2026

सार

Vamana Jayanti 2026 Date: भगवान विष्णु ने समय-समय पर अनेक अवतार लिए, वामन अवतार भी इनमें से एक हैं। इस अवतार में भगवान विष्णु ने एक बौने ब्राह्मण का रूप लिया था। जानें 2026 में कब है वामन जयंती?

Vamana Jayanti 2026 Details: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के दशावतारों का विशेष महत्व माना गया है। इन्हीं अवतारों में भगवान वामन का नाम भी आता है। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन जयंती मनाई जाती है। इस मौके पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। आगे जानिए साल 2026 में वामन जयंती किस दिन मनाई जाएगी, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त आदि की डिटेल…

कब है वामन जयंती 2026?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 22 सितंबर 2026, मंगलवार की रात 9 बजकर 43 मिनट से शुरू होगी और 23 सितंबर 2026, बुधवार की रात 10 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। चूंक द्वादशी तिथि का सूर्योदय 23 सितंबर, बुधवार को होगा, इसलिए इसी दिन वामन जयंती मनाई जाएगी।

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वामन जयंती 2026 शुभ मुहूर्त

सुबह 09:19 से 10:49 तक
सुबह 10:49 से दोपहर 12:19 तक
सुबह 11:55 से दोपहर 12:43 तक
दोपहर 12:19 से 01:49 तक
दोपहर 03:19 से 04:49 तक

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वामन जयंती पर कैसे करें पूजा?

- वामन जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- घर के किसी साफ स्थान पर लकड़ी की चौकी रखें और उस पर भगवान वामन की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- पूजा की शुरुआत भगवान वामन को कुमकुम का तिलक लगाकर करें। इसके बाद फूलों की माला पहनाएं और घी का दीपक जलाएं।
- भगवान वामन को जनेऊ, फूल, अबीर, गुलाल, रोली, अक्षत और नारियल सहित पूजा की अन्य सामग्री अर्पित करें।
- पूजा के दौरान ऊं नमो भगवते दधिवामनाय मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान को अपनी इच्छा अनुसार भोग लगाएं।
- पूजा पूरी होने के बाद भगवान वामन की आरती करें। इसके बाद वामन अवतार से जुड़ी कथा को सुनना शुभ माना जाता है।
- इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार जरूरतमंदों को दान करें। चावल, दही और मिश्री का दान करने की भी परंपरा बताई गई है।
- शाम के समय दोबारा भगवान वामन की पूजा करें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत पूरा करें और सात्विक भोजन करें।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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