
Varad Chaturthi Vrat Katha In Hindi: धर्म ग्रंथों के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि बहुत खास होती है। इसके कईं नाम हैं जैसे वरद चतुर्थी, तिलकूट चतुर्थी, तिलकुंद चतुर्थी और गौरीशंकर चतुर्थी। इस दिन भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है। इस बार ये चतुर्थी 22 जनवरी, गुरुवार को है। जो भी भक्त ये व्रत करता है, उसे इसकी कथा भी जरूर सुननी चाहिए। आगे पढ़ें वरद चतुर्थी की व्रत कथा…
वरद चतुर्थी की कथा ऋषि वशिष्ठ ने राजा दशरथ को सुनाई थी। उसके अनुसार किसी समय कौण्डिन नामक नगर में एक शूद्र व्यक्ति निवास करता था, उसका नाम भानु था। वह बहुत ही पापी था। वह रोज मदिरा पीता और जुआ खेलता। इसके साथ ही वह परस्त्री गमन जैसा घोर पाप भी करता था। भानु लोगों का धन लूटकर उनकी हत्या भी करता था।
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धीरे-धीरे धन के लालच में वह इतना अंधा हो गया कि बिना वजह लोगों की हत्या करने लगा। ब्राह्मणों की हत्या करने में भी उसे कोई संकोच नहीं होता था। एक दिन भानु वन में भटक रहा था। उस दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि थी। उस दिन उसे खाने-पीने के लिए कुछ भी नहीं मिला। दिन भर वह भूखा-प्यासा ही रहा, जिससे वह व्याकुल हो गया।
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उसी स्थिति में भानु ने रात भी बिताई। अगले दिन वह जैसे-तैसे अपने घर पहुंचा और पानी पीकर अपनी प्यास मिठाई। लेकिन पानी पीते ही उसे वमन यानी उल्टी हो गई। भूखा-प्यासा रहने से उसी क्षण उसकी मृत्यु हो गई। लेकिन अंजाने में उसने माघ मास के शुक्ल पक्ष की वरद चतुर्थी का व्रत कर लिया था, जिसके कारण उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई।
अज्ञानता में ही वरद चतुर्थी व्रत हो जाने से महापापी भानु को मोक्ष मिल गया। इसलिए इस चतुर्थी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस व्रत का कथा सुनने से भी कईं तह की सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
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