- Home
- Religion
- Tilakund Chaturthi 2026: कब करें तिलकुंद चतुर्थी व्रत? जानें पूजा की विधि, मंत्र और मुहूर्त
Tilakund Chaturthi 2026: कब करें तिलकुंद चतुर्थी व्रत? जानें पूजा की विधि, मंत्र और मुहूर्त
Tilakund Chaturthi 2026: माघ मास में तिलकुंद चतुर्थी का व्रत किया जाता है। इसे वरद चतुर्थी भी कहते हैं। इस व्रत में भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है और तिल से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है।

तिलकुंद चतुर्थी 2026 से जुड़ी खास बातें
Tilakund Chaturthi 2026 Kab Hai: धर्म ग्रंथों के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि बहुत खास होती है। इसे तिलकुंद और वरद चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान श्रीगणेश के साथ-साथ चंद्रमा की पूजा का भी विधान है। इस व्रत को करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और हर तरह से संकटों से छुटकारा मिलता है, ऐसा पुराणों में लिखा है। आगे जानिए इस बार कब है तिलकुंद चतुर्थी, इसकी पूजा विधि, मंत्र सहित पूरी डिटेल…
ये भी पढ़ें-
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में कब करें कन्या पूजन? जानें डेट
कब है तिलकुंद चतुर्थी 2026?
पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 21 जनवरी, बुधवार की रात 02 बजकर 47 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 22 जनवरी, गुरुवार की रात 02 बजकर 28 मिनिट तक रहेगी। चूंकि माघ शुक्ल चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 22 जनवरी, गुरुवार को होगा, इसलिए इसी दिन तिलकुंद चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।
ये भी पढ़ें-
Magh Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में करें ये 5 उपाय, जाग जाएगी सोई किस्मत
तिलकुंद चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त
22 जनवरी, गुरुवार को तिलकुंद चतुर्थी व्रत का पूजा मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 29 मिनिट से 01 बजकर 37 मिनिट तक रहेगा। ये समय श्रीगणेश की पूजा के लिए उत्तम है। इस दिन चंद्रोदय रात को करीब 9 बजकर 15 मिनिट पर होगा। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में अंतर आ सकता है।
तिलकुंद चतुर्थी व्रत-पूजा विधि
- 22 जनवरी, गुरुवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद तिलकुंद चतुर्थी व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- दिन भर भोजन आदि कुछ भी खाएं। अगर ऐसा संभव न हो तो फलाहार यानी दूध और फल ले सकते हैं।
- इस दिन किसी से भी विवाद न करें, किसी की बुराई और चुगली भी न करें। बुरे विचार भी मन में न लाएं।
- ऊपर बताए गए शुभ मुहूर्त में चौकी यानी लकड़ी के पटिए पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। श्रीगणेश की प्रतिमा को हार पहनाएं और तिलक लगाएं।
- इसके बाद एक-एक करके फल, फूल, चावल, रौली, मौली, जनेऊ, दुर्वा आदि चीजें भगवान को चढ़ाएं।
- पूजा के दौरान ऊं गं गणपत्यै नम: मंत्र का जाप मन में करते रहें। तिल-गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
- इसके बाद भगवान की आरती करें और प्रसाद बांट दें। संभव हो तो कुछ देर बैठकर मंत्र जाप भी करें।
- इस प्रकार जो व्यक्ति सच्चे मन से तिलकुंद चतुर्थी का व्रत करता है उसके घर में सुख-समृद्धि बनी रहेगी।
भगवान श्रीगणेश की आरती लिरिक्स हिंदी में
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।