
Vat Savitri Vrat 2026: ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर रखा जाने वाला वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। साल 2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को रखा जाएगा। इस व्रत को लेकर एक सवाल काफी पूछा जाता है कि क्या कुंवारी लड़कियां भी यह व्रत रख सकती हैं? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा से जानिए इस सवाल का जवाब…
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वट सावित्री व्रत क्यों करते हैं, इसका सवाल महाभारत में मिलता है। महाभारत की एक कथा के अनुसार सावित्री नाम की एक पतिव्रता स्त्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से ले आई थीं। उस दिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि थी। तभी से इस तिथि पर पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत व परिवार की खुशहाली के लिए ये व्रत किया जाता है। इसे व्रत को अखंड सौभाग्य से जुड़ा माना जाता है। इसी वजह से परंपरागत रूप से यह व्रत विवाहित महिलाएं ही रखती हैं।
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ज्योतिषाचार्य पं. शर्मा के अनुसार अविवाहित यानी कुंवारी लड़कियां भी यह व्रत रख सकती हैं। माना जाता है कि अगर कोई लड़की अच्छे जीवनसाथी की कामना करती है या शीघ्र विवाह की इच्छा रखती है, तो वह माता सावित्री का पूजन कर सकती है। कई स्थानों पर कुंवारी कन्याएं पूरे दिन का कठोर व्रत नहीं रखतीं, बल्कि केवल पूजा-पाठ कर आशीर्वाद लेती हैं।
अगर कोई अविवाहित लड़की वट सावित्री व्रत करना चाहती हैं तो घर के बड़े-बुजुर्गों या किसी योग्य विद्वान से सलाह लेना बेहतर माना जाता है। पूजा के दौरान बरगद के पेड़ की पूजा करें, माता सावित्री की कथा सुनें और योग्य जीवनसाथी के लिए प्रार्थना करें। अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने परिवार की मान्यता को ध्यान में रखकर ही व्रत करना उचित माना जाता है।
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