Ashok Dham Temple News: बिहार के लखीसराय में स्थित अशोक धाम मंदिर में 17 अगस्त की सुबह बड़ा हादसा हो गया जिसमें कईं श्रद्धालुओं की जान चली गई, वहीं कई घायल हो गए।

Ashok Dham Temple Stampede: सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के मौके पर बिहार के लखीसराय के प्रसिद्ध अशोक धाम मंदिर में सुबह-सुबह बड़ा हादसा हो गया। दर्शन करने आई भीड़ अचानक बेकाबू हो गई और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हादसे में कई श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। अशोक धाम मंदिर काफी प्राचीन है और इससे जुड़ी कईं रोचक मान्यताएं भी प्रचलित हैं।

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खेल-खेल में मिला प्राचीन शिवलिंग

मान्यता है कि साल 1977 में अशोक नाम का एक बालक अपने साथियों के साथ गिल्ली-डंडा खेल रहा था। खेल के दौरान उसे एक काले रंग का पत्थर दिखाई दिया। जब आसपास की मिट्टी हटाई गई तो पता चला कि वह कोई साधारण पत्थर नहीं, बल्कि विशाल शिवलिंग है। इसके बाद गांव के लोगों को इसकी जानकारी दी गई। धीरे-धीरे यह बात पूरे इलाके में फैल गई और लोग वहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचने लगे। बिहार पर्यटन की जानकारी में भी अशोक नाम के चरवाहे द्वारा गिल्ली-डंडा खेलते समय विशाल शिवलिंग देखने की इसी मान्यता का उल्लेख है।

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सदियों पुराना बताया जाता है मंदिर का इतिहास

अशोक धाम का वर्तमान स्वरूप भले ही बाद में विकसित हुआ, लेकिन इस स्थान की धार्मिक परंपरा को इससे कहीं पुराना बताया जाता है। स्थानीय मान्यताओं और विभिन्न ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, यहां सदियों पहले से शिव आराधना होती रही है। कुछ स्रोत इसे पाल वंश के काल से जोड़ते हैं और बताते हैं कि 8वीं शताब्दी में यहां पूजा की परंपरा शुरू हुई थी। बाद में 12वीं शताब्दी में यहां मंदिर निर्माण की बात भी सामने आती है।

अशोक के नाम पर पड़ा अशोक धाम

जब 1977 में जमीन से विशाल शिवलिंग के मिलने की खबर फैली तो इस स्थान पर श्रद्धालुओं का आना शुरू हुआ। चूंकि शिवलिंग की खोज करने वाले बालक का नाम अशोक बताया जाता है, इसलिए बाद में यह स्थान अशोक धाम के नाम से प्रसिद्ध हो गया। यहां भगवान शिव को इंद्रदमनेश्वर महादेव के रूप में पूजा जाता है। लखीसराय जिला प्रशासन के अनुसार, 11 फरवरी 1993 को जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य ने मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण का उद्घाटन किया था।