विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कब है, 29 या 30 सितंबर? जानें पूजा विधि, मंत्र, आरती और चंद्रोदय का समय

Published : Sep 27, 2026, 12:07 PM IST
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कब है

सार

धर्म ग्रंथों के अनुसार चतुर्थी तिथि के देवता भगवान श्रीगणेश हैं। इसलिए हर महीने के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि पर इनकी पूजा की जाती है और व्रत भी रखा जाता है। इनमें से आश्विन कृष्ण चतुर्थी को विघ्नराज चतुर्थी कहते हैं।

Vighnaraja Sankashti Chaturthi 2026 Date: हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना गया है, इसलिए गणेश भक्त इस दिन उनकी पूजा करते हैं। आश्विन मास में आने वाली चतुर्थी को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। इस दिन गणेश जी की पूजा के साथ रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। साल 2026 में यह व्रत सितंबर के आखिरी दिनों में रखा जाएगा। आगे जानिए इसकी तारीख, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त…

कब करें विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत 2026?

पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 10 सितंबर, बुधवार की दोपहर 03 बजकर 38 मिनिट से शुरू होगी, जो 11 सितंबर, गुरुवार को दोपहर 12 बजकर 45 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 10 सितंबर को उदय होगा, इसलिए इसी दिन विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा।

ये भी पढ़ें-
Dussehra 2026 Date: 20 या 21 अक्टूबर, क्या है विजयादशमी की सही डेट?

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी 2026 पूजा विधि

पंचांग के अनुसार इस बार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 29 सितंबर, मंगलवार की शाम 05 बजकर 10 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 30 सितंबर, बुधवार की दोपहर 02 बजकर 55 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का चंद्रोदय 29 सितंबर को होगा, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा।

ये भी पढ़ें-
Pitru Tarpan Mantra: पूर्वजों को जल देते समय पढ़ें ये मंत्र, पितृ पक्ष में ऐसे करें पितरों का स्मरण

कब होगा विघ्नराज चतुर्थी का चंद्रोदय?

29 सितंबर, मंगलवार को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का चन्द्रोदय रात 07 बजकर 44 मिनिट पर होगा। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय में आंशिक अंतर देखने को मिल सकता है।

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत-पूजा विधि

- 29 सितंबर, मंगलवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करके व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- पूरे दिन निर्जल व्रत रखें, ऐसा न कर पाएं तो फलाहार कर सकते हैं। दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें जैसे- झूठ न बोलें, क्रोध न करें आदि।
- रात में चंद्रोदय से पहले घर के किसी साफ स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। कुम कुमकुम से तिलक लगाएं और फूलों की माला अर्पित करें।
- इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाएं। गणेश जी को रोली, अक्षत, फूल, दूर्वा, पान, वस्त्र, जनेऊ, अबीर-गुलाल, सुपारी आदि चीजें एक-एक करके चढ़ाएं।
- पूजा करते समय मन ही मन में ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें। इसके बाद भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग लगाएं और आरती करें।
- रात को चंद्रोदय होने पर जल से अर्घ्य दें। फूल और चावल अर्पित करके भगवान गणेश का ध्यान करें। इसके बाद व्रत का पारण कर भोजन करें।
- धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से भगवान गणेश की कृपा मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

गणेशजी की आरती लिरिक्स

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी
माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा
लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

PREV

धार्मिक परंपराओं, मंदिरों, त्योहारों, यात्रा स्थलों और आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ी खबरें पढ़ें। पूजा पद्धति, पौराणिक कथाएं और व्रत-त्योहार अपडेट्स के लिए Religion News in Hindi सेक्शन देखें — आस्था और संस्कृति पर सटीक और प्रेरक जानकारी।

Read more Articles on

Recommended Stories

Pitru Paksha 2026: श्राद्ध पक्ष में भूलकर भी न करें ये 10 काम, पितृ हो सकते हैं नाराज
Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में 16 दिन ही क्यों? जानें पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या तक का रहस्य