
Vishwakarma Puja Kab Hai: हर साल सूर्य के सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करने के समय विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन खासतौर पर कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों और ऑफिस में मशीनों, औजारों और काम में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों की पूजा की जाती है। इस साल विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से सुख-समृद्धि और काम में तरक्की की कामना की जाती है। आइए जानते हैं भगवान विश्वकर्मा की पूजा की आसान विधि और इससे जुड़ी जरूरी बातें…
सुबह 10:50 से दोपहर 12:21 तक
दोपहर 11:57 से 12:45 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:21 से 01:52 तक
दोपहर 01:52 से 03:23 तक
- सुबह स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। इसके बाद हाथ में जल और चावल लेकर भगवान विश्वकर्मा की पूजा का संकल्प लें।
- पूजा से पहले घर, दुकान, ऑफिस या वर्कशॉप में पूजा के लिए एक साफ जगह तैयार करें। जगह को गंगाजल का छिड़काव करके पवित्र कर लें।
- पूजा स्थल पर लकड़ी का बाजोट या पटिया रखें। इस पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- सबसे पहले भगवान विश्वकर्मा को तिलक लगाएं। इसके बाद दीपक जलाकर फूल और माला अर्पित करें।
- अब भगवान को रोली, चावल, अबीर-गुलाल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। इसके बाद भोग लगाएं।
- विश्वकर्मा पूजा में औजारों और मशीनों की पूजा का भी खास महत्व माना जाता है। इसलिए काम में इस्तेमाल होने वाले औजार, मशीन और उपकरणों पर तिलक लगाकर मौली बांधें और उनकी पूजा करें।
- पूजा पूरी होने के बाद भगवान विश्वकर्मा की आरती करें। अंत में सुख-समृद्धि, काम में सफलता और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करें।
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि मे विधि को,
श्रुति उपदेश दिया ।
जीव मात्र का जग में,
ज्ञान विकास किया ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
ऋषि अंगीरा तप से,
शांति नहीं पाई ।
ध्यान किया जब प्रभु का,
सकल सिद्धि आई ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने,
जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बनकर,
दूर दुःखा कीना ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दंपति,
तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना,
विपत सगरी हरी ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन,
पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,
सकल रूप साजे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे तब पद का,
सकल सिद्धि आवे ।
मन द्विविधा मिट जावे,
अटल शक्ति पावे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा की आरती,
जो कोई गावे ।
भजत गजानांद स्वामी,
सुख संपति पावे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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