Mahashivratri 2026 Kab Hai: 15 या 16 फरवरी, कब है महाशिवरात्रि? नोट करें सही डेट

Published : Jan 24, 2026, 02:52 PM IST
Mahashivratri 2026 Kab Hai

सार

Mahashivratri 2026 Kab Hai: महाशिवरात्रि हिंदुओं के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। हर साल ये त्योहार फाल्गुन मास में मनाया जाता है। इस पर्व में भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस बार ये पर्व फरवरी 2026 में मनाया जाएगा।

Mahashivratri 2026 Date: धर्म ग्रंथों के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। शिवपुराण के अनुसार, इसी तिथि पर भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे और श्रीविष्णु और ब्रह्माजी की परीक्षा ली थी। शिवजी के लिंग रूप में प्रकट होने से ही महाशिवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई। इस दिन शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। जानें साल 2026 में कब मनाया जाएगा महाशिवरात्रि पर्व…

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2 दिन रहेगी फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी, रविवार की शाम 05 बजकर 05 मिनिट से शुरू होगी जो अगले दिन यानी 16 फरवरी, सोमवार की शाम 05 बजकर 34 मिनिट तक रहेगी। इस तरह ये तिथि 2 दिन होने से महाशिवरात्रि पर्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है।

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क्या है महाशिवरात्रि 2026 की सही डेट?

ज्योतिषाचार्य पं. द्विवेदी के अनुसार महशिवरात्रि पर्व में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात को महादेव का पूजन किया जाता है। ये स्थिति 15 फरवरी, रविवार को बन रही है क्योंकि 16 फरवरी को रात्रि से पूर्व ही चतुर्दशी तिथि समाप्त हो जाएगी। विद्वानों की भी यही मत है कि साल 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाना उचित है।

महाशिवरात्रि 2026 पर कौन-से शुभ योग बनेंगे?

15 जनवरी, रविवार को महाशिवरात्रि पर सर्वार्थसिद्धि योग पूरे दिन रहेगा। साथ ही इस दिन कुंभ राशि में सूर्य, बुध और शुक्र ग्रह के साथ होने से बुधादित्य और शुक्रादित्य नाम के 2 राजयोग भी बनेंगे। इनके अलावा और भी कईं शुभ योग महाशिवरात्रि पर बनेंगे, जिससे इस पर्व का महत्व और भी अधिक रहेगा।

क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि?

महाशिवरात्रि पर्व मनाने के पीछे कईं कथाएं प्रचलित हैं, इनमें से सबसे प्रमुख ये है कि इस तिथि पर महादेव पहली बार लिंग रूप में प्रकट हुए थे। वहीं कुछ विद्वानों का मत ये भी है कि इस तिथि पर शिवजी भारत के 12 अलग-अलग स्थानों पर ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। कुछ लोग इस पर्व शिव-पार्वती विवाह के रूप में भी मनाते हैं।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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