Kali Puja 2026: दिवाली पर बंगाल में क्यों होती है मां काली की पूजा? जानिए सदियों पुरानी परंपरा के पीछे की दिलचस्प वजह

Published : Nov 05, 2026, 04:23 PM IST
Kali Puja During Diwali in West Bengal

सार

Why Is Kali Puja Celebrated During Diwali in West Bengal: पश्चिम बंगाल में दिवाली के दिन मां लक्ष्मी की जगह मां काली की पूजा क्यों होती है? जानिए बंगाल में काली पूजा का इतिहास, शाक्त परंपरा और इस खास धार्मिक उत्सव का महत्व।

Kali Puja History: देश के ज्यादातर हिस्सों में दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा होती है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसी रात मां काली की आराधना का विशेष महत्व है। यहां दिवाली को सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि मां काली की भक्ति और शक्ति की उपासना के रूप में भी मनाया जाता है। आखिर बंगाल में दिवाली के दिन मां काली की पूजा क्यों होती है? इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और ऐतिहासिक परंपरा क्या है? जानिए

दिवाली की रात मां काली की पूजा क्यों?

बंगाल में दिवाली के दिन होने वाली इस पूजा को काली पूजा या श्यामा पूजा कहा जाता है। यह कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाई जाती है। यही वह रात होती है, जब देश के दूसरे हिस्सों में दिवाली के अवसर पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। बंगाल में मां काली को शक्ति, साहस और बुराई का नाश करने वाली देवी माना जाता है। भक्त उनसे जीवन की परेशानियों, नकारात्मक शक्तियों और बुरी परिस्थितियों से रक्षा करने की प्रार्थना करते हैं। इस परंपरा की एक बड़ी वजह बंगाल में शाक्त परंपरा का गहरा प्रभाव है। शाक्त परंपरा में देवी को सर्वोच्च शक्ति और सृष्टि की मूल ऊर्जा माना जाता है। यही वजह है कि बंगाल में मां काली की भक्ति का विशेष स्थान है।

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16वीं सदी से जुड़ा है काली पूजा का इतिहास

बंगाल में मां काली की पूजा को लोकप्रिय बनाने का श्रेय 16वीं सदी के तांत्रिक विद्वान कृष्णानंद आगमवागीश को दिया जाता है। उनसे जुड़ी एक प्रसिद्ध मान्यता है कि मां काली ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए थे। हालांकि, इस कथा को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित घटना नहीं माना जा सकता। बाद के दौर में बंगाल के राजाओं और जमींदारों ने भी काली पूजा को बढ़ावा दिया। धीरे-धीरे यह पूजा निजी धार्मिक अनुष्ठान से निकलकर बड़े सामुदायिक उत्सव का रूप लेने लगी।

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रातभर होती है मां काली की आराधना

काली पूजा की रात बंगाल में मंदिरों, घरों और पूजा पंडालों को रोशनी से सजाया जाता है। मां काली की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और विशेष पूजा-अर्चना होती है। कई जगहों पर आधी रात के समय पूजा का विशेष महत्व रहता है। यही वजह है कि बंगाल में दिवाली का रंग थोड़ा अलग नजर आता है। जहां देश के कई हिस्सों में मां लक्ष्मी की आराधना प्रमुख होती है, वहीं बंगाल में मां काली की भक्ति इस पर्व को एक अलग पहचान देती है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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