क्यों कहा जाता है ‘बंगाली वैलेंटाइन डे’
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने की शुक्ल पंचमी को सरस्वती पूजा मनाई जाती है। देवी सरस्वती को ज्ञान, संगीत और कला की देवी माना जाता है। लेकिन पश्चिम बंगाल में इस पूजा ने समय के साथ एक अलग सामाजिक रंग भी ले लिया है। जहां वैलेंटाइन वीक को कई लोग जरूरत से ज्यादा व्यावसायिक मानते हैं, वहीं सरस्वती पूजा आज भी सादगी, परंपरा और भावनाओं से जुड़ी हुई है।
कोलकाता समेत पूरे बंगाल में यह दिन सिर्फ धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक उत्सव भी है। पंडालों में घूमते युवा, हंसी-मजाक, और बिना किसी दबाव के रिश्तों को समझने का मौका, यही सरस्वती पूजा को खास बनाता है। शायद इसी कारण इसे बंगाल का अनौपचारिक वैलेंटाइन डे कहा जाता है, जहां प्यार दिखावे से नहीं, सादगी से झलकता है।