Shani Pradosh 2022: शुभ मुहूर्त में करें शनि प्रदोष की पूजा, जानें विधि, आरती, कथा और महत्व

Published : Nov 05, 2022, 05:45 AM IST
Shani Pradosh 2022: शुभ मुहूर्त में करें शनि प्रदोष की पूजा, जानें विधि, आरती, कथा और महत्व

सार

Shani Pradosh 2022: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए महीने में कई व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। ऐसा ही एक व्रत है प्रदोष। ये व्रत प्रत्येक महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। विभिन्न वारों के साथ मिलकर ये अलग-अलग योग बनाता है।  

उज्जैन. इस बार 5 नवंबर, शनिवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इस दिन प्रदोष व्रत (Shani Pradosh 2022) किया जाएगा। इस दिन शनिवार होने से ये शनि प्रदोष कहलाएगा। प्रदोष व्रत में दिन भर व्रत रखने के बाद शाम को शिवजी की पूजा की जाती है। इस दिन प्रजापति और हर्षण नाम के 2 शुभ योग भी रहेंगे। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05:33 से रात 08:10 तक रहेगा। आगे जानिए शनि प्रदोष (Shani Pradosh Vrat 2022) पर किसी विधि से करें शनिदेव की पूजा व अन्य खास बातें…

इस विधि से करें व्रत-पूजा (Shani Pradosh Puja Vidhi)
-  शनिवार को सुबह व्रत-पूजा का संकल्प लें। दिन भर निराहार रहें और शाम को शुभ मुहूर्त शिवजी की पूजा करें।
- शिवजी का अभिषेक शुद्ध जल से करें, फिर पंचामृत से और फिर दोबारा शुद्ध जल चढ़ाएं। इसके बाद शुद्ध घी का दीपक लगाएं। 
- पंचोपचार पूजा के बाद शिवजी को बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़ा, फूल आदि चीजें चढ़ाएं। इसके बाद सत्तू का भोग लगाएं। 
- 8 दीपक अलग-अलग दिशाओं में लगाएं। सबसे अंत में शिवजी की आरती करें। इस प्रकार पूजा करने से आपकी हर इच्छा पूरी हो सकती है।

शिवजी की आरती (Shivji Ki Aarti)
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा|
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

शनि प्रदोष व्रत कथा (Shani Vrat Katha)
- किसी समय एक एक नगर में एक दयालु सेठ रहता था, लेकिन उसकी कोई संतान नहीं थी। एक दिन सेठ और उसकी पत्नी तीर्थयात्रा पर निकले। रास्ते में एक साधु पेड़ के नीचे समाधि लगाए बैठे दिखाई दे। 
- दोनों पति-पत्नी उनका आशीर्वाद लेने के लिए वहीं रूक गए। साधु की तपस्या दिन और रात चलती रही। अगली सुबह साधु ने आंखें खोली तो सामने सेठ-सेठानी को अपने सामने बैठे पाया। 
- दोनों ने साधु को प्रणाम किया और प्रतीक्षा करने की बात भी बताई। साधु बहुत तपस्वी थे। उन्होंने दोनों के मन की बात जान ली और संतान प्राप्ति के लिए शनि प्रदोष व्रत करने की सलाह दी।
- तीर्थयात्रा से लौटकर पति-पत्नी विधि-विधान पूर्वक व्रत करने लगे। जल्दी ही उनके घर में एक सुंदर पुत्र ने जन्म लिया। इस तरह शनि प्रदोष व्रत के प्रभाव से दोनों पत्नी खुशी-खुशी रहने लगे।


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