
मुंबई: 2026 T20 वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफाइनल में जब सूर्यकुमार यादव की टीम इंडिया और हैरी ब्रूक की इंग्लैंड की टीमें भिड़ेंगी, तो मुकाबला सिर्फ इन दो टीमों के बीच नहीं होगा। वानखेड़े में असली लड़ाई उस 'अदृश्य शक्ति' से होगी जो मैच का रुख तय करती है - यानी ओस (Dew)। जो टीम इस चुनौती से पार पा लेगी, फाइनल का टिकट उसी का होगा। वानखेड़े स्टेडियम समंदर के ठीक बगल में है, इसलिए यहां रात में दूसरे मैदानों के मुकाबले कहीं ज़्यादा ओस पड़ती है। इसकी वजह से फील्डिंग करने वाली टीम के लिए गेंद को पकड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है।
ओस के कारण स्पिनर्स गेंद को ठीक से ग्रिप नहीं कर पाते और पेसर्स का भी गेंद पर कंट्रोल कम हो जाता है। गेंद गीली होकर हाथ से फिसलने लगती है। वहीं, बाद में बैटिंग करने वाली टीम को इसका फायदा मिलता है, क्योंकि गेंद बल्ले पर और तेज़ी से आती है। रिकॉर्ड देखें तो वानखेड़े में हमेशा बाद में बैटिंग करने वाली टीम का पलड़ा भारी रहा है (123 जीत)। लेकिन इस वर्ल्ड कप में कहानी थोड़ी बदली हुई है। इस टूर्नामेंट में यहां हुए 7 रात के मैचों में से 3 बार पहले बैटिंग करने वाली टीम जीती है। टीम इंडिया ने भी अपने पहले मैच में अमेरिका के खिलाफ 161 रन बनाकर जीत हासिल की थी।
वेस्टइंडीज़ ने इंग्लैंड के खिलाफ 196 रन और ज़िम्बाब्वे के खिलाफ 254 रन बनाकर मैच जीते। वैसे तो वानखेड़े को पेसर्स का गढ़ माना जाता है, लेकिन इस टूर्नामेंट में स्पिनर्स भी बराबर की टक्कर दे रहे हैं। आंकड़े देखिए: स्पिनर्स ने 24।65 की औसत से 40 विकेट लिए हैं, जबकि पेसर्स ने 27।00 की औसत से 43 विकेट चटकाए हैं। अगर मैच में ओस जल्दी गिरना शुरू हो गई, तो स्पिनर्स के इस शानदार प्रदर्शन पर पानी फिर सकता है।
मुंबई की तेज़ गर्मी में पिच टूटे नहीं, इसके लिए क्यूरेटरों ने पिच पर हल्की घास छोड़ी है और उसे नम रखा है। इससे पिच पर अच्छी स्पीड और उछाल तो मिलेगी, लेकिन इसका एक साइड इफेक्ट भी है। रात में जैसे ही तापमान गिरेगा, मैदान पर भारी ओस गिरने की आशंका बढ़ जाएगी। ऐसे में जो भी टीम टॉस जीतकर पहले बैटिंग करती है, उसे कम से कम 170 से ज़्यादा का स्कोर बनाना होगा, तभी वह इसे डिफेंड करने के बारे में सोच सकती है।