भारत की सबसे युवा सांसदों में से एक और समाजवादी पार्टी के नेता तूफानी सरोज की बेटी प्रिया सरोज क्रिकेटर रिंकू सिंह से शादी करेंगी। 25 साल की प्रिया सुप्रीम कोर्ट की वकील हैं और उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में मछलीशहर सीट से जीत हासिल की है।
प्रिया सरोज की बायोग्राफी, उनकी शिक्षा, होने वाले पति रिंकू सिंह और मछलीशहर से सांसद बनने तक का सफर- प्रिया सरोज आज उत्तर प्रदेश की राजनीति में सबसे चर्चित चेहरों में से एक बन गई हैं। वाराणसी में बचपन से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत और क्रिकेटर रिंकू सिंह से उनकी हाई-प्रोफाइल सगाई तक, प्रिया की कहानी में राजनीति, कानून और ग्लैमर का दिलचस्प मेल है।
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कौन हैं प्रिया सरोज - संक्षिप्त जीवनी और शुरुआती जीवन?
प्रिया सरोज का जन्म 23 नवंबर 1998 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के करखियांव गांव में एक राजनीतिक परिवार में हुआ। उनके पिता तूफानी सरोज तीन बार के सांसद और मौजूदा विधायक हैं। प्रिया ने नई दिल्ली के एयर फोर्स गोल्डन जुबली इंस्टीट्यूट से पढ़ाई की, दिल्ली यूनिवर्सिटी से आर्ट्स में ग्रेजुएशन किया और फिर नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी से LLB की डिग्री ली। राजनीति में आने से पहले उन्होंने एक वकील के तौर पर काम किया और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस का अनुभव भी हासिल किया।
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राजनीतिक उदय: मछलीशहर की जीत
प्रिया ने 2024 के आम चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मछलीशहर (SC) सीट से चुनाव जीता। उन्होंने बीजेपी के बी. पी. सरोज को एक बड़े अंतर से हराया। इस जीत ने उन्हें उस लोकसभा की सबसे युवा सांसदों में से एक बना दिया। उनकी इस कामयाबी को मीडिया में काफी कवरेज मिली और यह उनके कानूनी करियर से राष्ट्रीय राजनीति में आने का एक बड़ा संकेत था।
पहली बार सांसद बनीं प्रिया ने कहा है कि उनका फोकस युवा रोजगार, महिला सशक्तिकरण और अपने संसदीय क्षेत्र जौनपुर-वाराणसी बेल्ट के स्थानीय विकास पर होगा। जानकारों का कहना है कि उनकी कानूनी ट्रेनिंग उन्हें नीतिगत मामलों और भाषण देने में आत्मविश्वास देती है, जबकि उनके परिवार के राजनीतिक नेटवर्क ने उन्हें पार्टी और सार्वजनिक जिम्मेदारियों को संभालने में मदद की है।
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निजी जीवन: एक क्रिकेटर से सगाई।
जून 2025 में भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह से सगाई के बाद प्रिया की पर्सनल लाइफ सुर्खियों में आ गई। इस कार्यक्रम में बड़े राजनेता और फिल्मी सितारे शामिल हुए, जिससे यह एक वायरल कल्चरल मोमेंट बन गया। हालांकि, जब चुनाव आयोग ने रिंकू को उत्तर प्रदेश में मतदाता-जागरूकता सिंबल के पद से हटाने की मांग की तो उनकी निष्पक्षता पर भी सवाल उठे थे।
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प्रिया सरोज क्यों मायने रखती हैं?
प्रिया भारतीय राजनीति में एक बढ़ते ट्रेंड का उदाहरण हैं: युवा, शिक्षित और प्रोफेशनल डिग्री (उनके मामले में कानून) वाले नए चेहरे, जिन्हें पारिवारिक राजनीतिक विरासत का भी फायदा मिलता है।
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कौन हैं प्रिया सरोज?
प्रिया का तेजी से हुआ यह उदय दिखाता है कि अब उन पर इस बात का दबाव होगा कि वे सुर्खियों को जमीनी काम में कैसे बदलती हैं। चाहे वह संसद में हो, स्थानीय परियोजनाओं में हो, या युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित पहलों के जरिए हो।