IPL 2026 क्वालिफायर-1 में RCB का मुकाबला GT से है। कोहली-गिल के बजाय, मैच का फैसला गेंदबाज़ करेंगे। दोनों टीमों की पावरप्ले गेंदबाज़ी मजबूत है, लेकिन GT (102 विकेट) के आंकड़े RCB (86 विकेट) से बेहतर हैं।

नई दिल्लीः एक 'किंग' और दूसरा 'प्रिंस'। भारतीय क्रिकेट फैंस विराट कोहली और शुभमन गिल को इसी नाम से बुलाते हैं। अब IPL 2026 के क्वालिफायर-1 में प्रिंस, किंग को चुनौती देने के लिए तैयार है। जी हाँ, मुकाबला है रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच। इन दोनों स्टार्स का आमना-सामना मैच की चमक-दमक तो बढ़ाएगा, लेकिन असली गेम चेंजर कोई और होगा - गेंदबाज़।

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क्रिकेट में एक कहावत है - 'गेंदबाज़ आपको टूर्नामेंट जिताते हैं'। इस सीज़न में यह बात बेंगलुरु और गुजरात, दोनों टीमों पर बिल्कुल फिट बैठती है। एक तरफ भुवनेश्वर कुमार और जोश हेज़लवुड की जोड़ी है, जिनका साथ देने के लिए सुयश शर्मा, क्रुणाल पंड्या और रासिक धर हैं। तो दूसरी तरफ, कगिसो रबाडा और मोहम्मद सिराज की घातक जोड़ी है, जिन्हें राशिद खान, प्रसिद्ध कृष्णा और जेसन होल्डर का सपोर्ट मिलता है।

ये टीमें इस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाली टॉप दो टीमें हैं। बेंगलुरु ने 86 विकेट लिए हैं, तो गुजरात ने 102। दोनों की इकॉनमी रेट भी क्रमशः 9.6 और 9.2 की रही है। कागज़ पर देखें तो गुजरात की गेंदबाज़ी थोड़ी ज़्यादा मज़बूत दिखती है। लेकिन दोनों टीमों की सबसे बड़ी ताकत रही है पावरप्ले में उनकी कसी हुई गेंदबाज़ी। और यहीं पर मैच का नतीजा तय हो सकता है।

सिराज और रबाडा पावरप्ले में सिर्फ विकेट ही नहीं लेते, बल्कि रन रोकने में भी माहिर हैं। वहीं, भुवी और हेज़लवुड विकेट तो लेते हैं, लेकिन कई बार महंगे साबित हो जाते हैं। यहीं से मैच-अप का खेल शुरू होता है।

गिल की आदत है कि वो हेज़लवुड पर शुरुआत से ही हमला करके उन्हें लय से भटका देते हैं। लेकिन भुवी के सामने गिल का बल्ला अब तक खामोश ही रहा है। भुवी ने उन्हें 5 बार आउट किया है और उनके खिलाफ गिल का स्ट्राइक रेट सिर्फ 107 का है। वहीं, साई सुदर्शन भी हेज़लवुड के सामने संघर्ष करते दिखे हैं। अगर RCB इन दोनों को पावरप्ले में ही पवेलियन भेज देती है, तो वो गुजरात के कमज़ोर मिडिल ऑर्डर पर दबाव बना सकती है।

अगर धर्मशाला की पिच उछाल भरी हुई, तो स्पिनर्स का रोल कम हो सकता है। ऐसे में क्रुणाल पंड्या बीच के ओवरों में RCB के लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं, जो दबाव में अपना खेल सुधार लेते हैं। गुजरात के गेंदबाज़ों की बात करें तो रबाडा बनाम कोहली की टक्कर देखने लायक होगी। रबाडा ने इस भारतीय दिग्गज को 5 बार आउट किया है। अगर फिल साल्ट की टीम में वापसी होती है, तो रबाडा का उनके खिलाफ भी शानदार रिकॉर्ड रहा है।

ज़्यादातर मैचों में रबाडा ने तब विकेट चटकाए हैं, जब दूसरे छोर से सिराज ने रन रोककर दबाव बनाया है। धर्मशाला में यह रणनीति काम करती है या नहीं, यह देखना दिलचस्प होगा। गुजरात के उलट, बेंगलुरु का मिडिल ऑर्डर कमज़ोर नहीं है। देवदत्त पडिक्कल, रजत पाटीदार, टिम डेविड और रोमारियो शेफर्ड जैसे बल्लेबाज़ हैं। सिर्फ जितेश शर्मा ही फॉर्म में नहीं हैं।

इसलिए, बीच के ओवरों में गेंदबाज़ी करने वाले राशिद खान और प्रसिद्ध कृष्णा के लिए काम आसान नहीं होगा। राशिद ने इस सीज़न 19 और प्रसिद्ध ने 14 विकेट लिए हैं। पावरप्ले की तरह ही, मैच का यह फेज़ भी बहुत अहम होगा, और यहाँ RCB का पलड़ा भारी लगता है। साई-गिल-बटलर की तिकड़ी के शानदार फॉर्म ने गुजरात के मिडिल ऑर्डर के रोल को कम कर दिया है। अगर बड़े मैच में उन पर दबाव आया, तो संभलना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में जेसन होल्डर ही उनकी आखिरी उम्मीद होंगे।

बेंगलुरु ने धर्मशाला में जो एकमात्र मैच खेला था, उसमें पंजाब के खिलाफ उनके सभी बल्लेबाज़ों ने रन बनाए थे, खासकर वेंकटेश अय्यर ने। देखना होगा कि RCB उनका इस्तेमाल कैसे करती है। यह क्वालिफायर-1 गुजरात का धर्मशाला में पहला मैच होगा। इसलिए, RCB को यहाँ के हालात का ज़्यादा अनुभव है। लीग स्टेज में जब ये दोनों टीमें भिड़ी थीं, तो दोनों ने अपने-अपने घरेलू मैदान पर जीत दर्ज की थी।