मेसी की चाय, एक ख़ास कैंडी और टोटके...अर्जेंटीना की जीत के पीछे की 'कबाला' कहानी

Published : Jun 23, 2026, 12:01 PM IST
Messis

सार

अर्जेंटीना फुटबॉल टीम जीत के लिए 'कबाला' यानी टोटकों का पालन करती है। मैच से पहले खिलाड़ी खास कैंडी खाते हैं और मेसी चाय पीते हैं। इन रिवाजों के बाद से टीम ने 1 वर्ल्ड कप समेत 4 बड़ी ट्रॉफियां जीती हैं।

टेक्सास: लैटिन अमेरिकी फुटबॉल का जुनून ही अलग है। और इस जुनून के साथ कुछ अंधविश्वास भी जुड़े हैं। खिलाड़ियों को लगता है कि शानदार खेल के अलावा, थोड़ी किस्मत भी साथ होनी चाहिए। दुनिया की टॉप टीमों में से एक अर्जेंटीना भी इससे अलग नहीं है। कोच लियोनेल स्कालोनी की देखरेख में टीम लगातार जीत रही है, लेकिन इस जीत के पीछे खिलाड़ियों की मेहनत के साथ-साथ कुछ दिलचस्प 'रिवाज़' भी हैं।

अर्जेंटीना के लोग इसे 'कबाला' (Cabala) कहते हैं। मतलब, गुडलक के लिए किए जाने वाले कुछ पक्के टोटके। टीम जैसे ही स्टेडियम पहुंचती है, ये कबाला शुरू हो जाते हैं। टीम बस से उतरते ही दो खिलाड़ी, रोड्रिगो डी पॉल और लिएंड्रो परेडेस, सीधे मैदान के बीच में जाते हैं। वहां फैन्स का अभिवादन करने के बाद, दोनों आपस में बात करते हुए एक ख़ास कैंडी खाते हैं।

यह कैंडी खाना इतना ज़रूरी है कि बाकी खिलाड़ियों के अपने जूते के फीते बांधने से पहले ही ये रस्म पूरी हो जाती है। यह सिलसिला 2021 कोपा अमेरिका के क्वार्टर फाइनल मैच से शुरू हुआ था और तब से टीम का एक अहम हिस्सा बन गया है। ये कोई ऐसी-वैसी कैंडी नहीं है। ये स्विट्जरलैंड में बनी एक ख़ास कैंडी है, जिसकी लंबाई-चौड़ाई ठीक 20 मिलीमीटर और मोटाई 7 मिलीमीटर होती है।

एक और ज़रूरी रस्म है मैच से ठीक पहले चाय पीना। कप्तान लियोनेल मेसी और डी पॉल साथ में चाय पीते हैं। अगर अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष क्लॉडियो तापिया वहां मौजूद होते हैं, तो वो भी इस चाय सेशन में शामिल हो जाते हैं। वहीं, कोच लियोनेल स्कालोनी का भी अपना एक टोटका है। वो हमेशा मैदान में अपना दाहिना पैर पहले रखते हैं। कहा जाता है कि जब से स्कालोनी कोच बने हैं, तभी से ये सारे लकी चार्म टीम का हिस्सा बने।

जब से ये 'मीठे अंधविश्वास' शुरू हुए हैं, तब से अर्जेंटीना के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। टीम ने 77 मैचों में 58 जीते हैं, 14 ड्रॉ खेले हैं और सिर्फ 5 हारे हैं। इतना ही नहीं, इस दौरान अर्जेंटीना ने एक वर्ल्ड कप समेत चार बड़ी अंतरराष्ट्रीय ट्रॉफियां भी अपने नाम की हैं। इसलिए, यह तो तय है कि जीत का मीठा स्वाद चखाने वाला यह 'कैंडी कबाला' आगे भी जारी रहेगा।

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