
टोरंटो: दुनिया भर के इटैलियन फैंस को निराश करते हुए बोस्निया ने इस बार फीफा वर्ल्ड कप 2026 का टिकट कटाया है। यूरोपियन प्ले-ऑफ के पेनल्टी शूटआउट में इटली जैसी बड़ी टीम को चौंकाने वाली बोस्नियाई टीम से अब वर्ल्ड कप में भी ऐसे ही उलटफेर की उम्मीद की जा रही है। टीम का पहला मुकाबला टोरंटो में सह-मेजबान कनाडा से है।
बोस्निया की टीम पूरे 12 साल के लंबे गैप के बाद फुटबॉल के इस महाकुंभ में लौटी है। लेकिन ये सिर्फ एक वापसी नहीं है, इस टीम की असली ताकत एक ऐसा कप्तान है जो मैदान पर खून-पसीना बहाने से भी पीछे नहीं हटता। हम बात कर रहे हैं 40 साल के कप्तान एडिन जेको की, जो बोस्नियाई टीम की धड़कन हैं। उम्र 40 के करीब है, लेकिन आज भी वो उसी जोश और जुनून के साथ टीम के लिए लड़ते हैं। जेको का जज्बा देखना हो तो इटली के खिलाफ हुआ वो अहम प्ले-ऑफ मैच काफी है।
मैच के दौरान कंधे में गंभीर चोट लगने के बावजूद जेको दर्द की परवाह किए बिना मैदान पर डटे रहे। और जब टीम ने वर्ल्ड कप क्वालिफाई करने का ऐतिहासिक लम्हा हासिल किया, तो वो चोटिल हाथ को शरीर से बांधकर मैदान पर दौड़ते हुए जीत का जश्न मना रहे थे। ये नजारा किसी भी फुटबॉल फैन का दिल छू लेने वाला था।
इस बार बोस्निया को मेजबान कनाडा, स्विट्जरलैंड और कतर के साथ ग्रुप में रखा गया है। बोस्नियाई खेमे का मानना है कि वे इस ग्रुप से अगले राउंड में पहुंच सकते हैं। कप्तान जेको ने कहा कि अपने देश के लिए वर्ल्ड कप में खेलना बहुत गर्व की बात है। उन्होंने कहा, "वर्ल्ड कप जैसे मंच पर देश की जर्सी पहनना एक ऐसा सम्मान है जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यह दुनिया को अपना जुझारूपन दिखाने का एक मौका है।"
वर्ल्ड कप के इतिहास में बोस्निया का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2014 में ईरान के खिलाफ मिली जीत है। टीम इस बार उसी जीत की लय को आगे बढ़ाना चाहती है। फिलहाल, टीम की एकमात्र चिंता कप्तान की चोट है। लेकिन क्वालिफायर में जब इटली को हराया था, तब भी जेको चोट के कारण बाहर बैठने के बावजूद साइडलाइन से अपने साथियों का हौसला बढ़ा रहे थे। यही हीरो वाला जज्बा इस बार भी बोस्निया की सबसे बड़ी ताकत है।