Brazil Football: एंसेलोटी का 'परफेक्ट' नहीं 'जिद्दी' प्लान, क्या विनीसियस ब्राजील को दिलाएंगे छठी ट्रॉफी?

Published : Jun 12, 2026, 05:55 PM IST
Brazil Football: एंसेलोटी का 'परफेक्ट' नहीं 'जिद्दी' प्लान, क्या विनीसियस ब्राजील को दिलाएंगे छठी ट्रॉफी?

सार

5 बार की विश्व चैंपियन ब्राजील फुटबॉल टीम हाल में संघर्ष कर रही है। कोच एंसेलोटी के नेतृत्व में, टीम अब नेमार पर निर्भर नहीं है। विनीसियस जूनियर का मजबूत अटैक इसकी ताकत है, जबकि मिडफील्ड और डिफेंस कमजोरियां हैं।

नई दिल्लीः अमेजन के जंगल, मैदान पर 'जोगा बोनिटो' का जादू.. ब्राजील की धरती पर शायद ही इससे खूबसूरत कुछ और हो। पेले, जीको, सुकरात, गरिंचा, रोनाल्डिन्हो, रोनाल्डो, काफू, रिवाल्डो…न जाने कितने ही नाम हैं जो फुटबॉल की दुनिया में संघर्ष और जीत का प्रतीक बन गए। यूरोप के मैदानों से रियो डी जनेरियो की गलियों तक पहुंचा फुटबॉल जब एक पूरे देश की पहचान बन गया, तो सोचिए इन खिलाड़ियों ने अपने पैरों से क्या जादू किया होगा।

लेकिन 21वीं सदी के ढाई दशक बीत जाने के बाद आज यह सवाल पूछना पड़ रहा है कि ब्राजील के फुटबॉल को आखिर हुआ क्या है? पिछले करीब 25 सालों में वो कैसे गुमनाम से हो गए, जबकि एक दौर था जब सब कुछ वही थे। अब जब टीम अमेरिका में वर्ल्ड कप के लिए उतरेगी, तो वो कितना आगे जा पाएगी? पांच वर्ल्ड कप खिताबों का इतिहास अपनी जगह है, लेकिन कुछ कड़वी सच्चाईयां हैं जो टीम को परेशान कर रही हैं। सवाल यह है कि क्या कार्लो एंसेलोटी के खिलाड़ी इन सबसे पार पा सकेंगे?

जब एंसेलोटी से पूछा गया कि क्या उनकी सपनों की टीम 'परफेक्ट' है, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। 'डॉन कार्लो' ने कहा कि वर्ल्ड कप जीतने के लिए एक 'परफेक्ट' टीम नहीं, बल्कि एक 'रेसिलिएंट' यानी जुझारू और जिद्दी टीम की जरूरत होती है, और वो वैसी ही टीम बनाने की कोशिश कर रहे हैं। यह सच भी है, आज ब्राजील की टीम फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल या अर्जेंटीना जितनी मजबूत शायद नहीं है। वर्ल्ड कप क्वालिफायर में 6 हार झेलने वाली यह टीम धीरे-धीरे अपनी पहचान खो रही थी। इतिहास में पहली बार खुद ब्राजील के लोग मानने लगे थे कि टीम को पटरी पर लाने के लिए किसी ब्राजीलियन कोच से काम नहीं चलेगा।

तो एंसेलोटी की खासियत क्या है? वो खिलाड़ियों को अपने सिस्टम में फिट नहीं करते, बल्कि खिलाड़ियों के खेल और उनकी स्टाइल के हिसाब से एक सिस्टम बनाते हैं। उन्होंने एसी मिलान और रियल मैड्रिड में यही किया था। ब्राजील के साथ भी वो कुछ अलग नहीं कर रहे। अगर पिछले पांच वर्ल्ड कप वाली गलती दोहरानी नहीं है, तो टीम को 'स्टार मोमेंट्स' की नहीं, बल्कि एक टीम की तरह खेलने की जरूरत है।

जिन सालों में ब्राजील ने वर्ल्ड कप जीता, तब भी यह पूरी तरह नहीं कहा जा सकता कि वो टूर्नामेंट की सबसे बेहतरीन टीम थी। इतिहास गवाह है कि 1982 में जब वो अपनी सबसे अच्छी टीम के साथ उतरे थे, तो दूसरे ही दौर में बाहर हो गए थे। इस बार ब्राजील की टीम की ताकत उसके नामों को देखकर ही पता चल जाती है - अटैक। एंसेलोटी ने टीम को इस तरह से तैयार किया है कि अटैक का ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाया जा सके। पिछले डेढ़ दशक की तरह इस बार टीम 'नेमार सेंटर्ड' यानी नेमार पर पूरी तरह निर्भर होकर नहीं उतर रही है।

टीम में विनीसियस जूनियर, मैथ्यूस कुन्हा, गैब्रियल मार्टिनेली, इगोर थियागो, एंड्रिक, रायन और साथ में नेमार भी हैं। ब्राजील के फैंस के लिए शायद यह नेमार का टूर्नामेंट हो, लेकिन असल में यह विनीसियस का है। ब्राजील का सफर कितना लंबा होगा, यह विनीसियस की रचनात्मकता तय करेगी। वो दुनिया के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं, एक ऐसे क्रिएटर जो किसी भी सामान्य पल को विरोधी टीम के लिए खतरनाक बना सकते हैं, और इसके लिए उन्हें टीम के सपोर्ट की भी जरूरत नहीं पड़ती।

प्रेसिंग, लिंक-अप और अटैक के लिए राफिन्हा हैं। पोजिशंस के बीच खेलने में माहिर कुन्हा हैं। रफ्तार के लिए मार्टिनेली हैं। एंड्रिक का खेल अप्रत्याशित है और रायन की गोल स्कोरिंग कमाल की है। बस एक कमी यह है कि इगोर थियागो फॉर्म में होने के बावजूद वर्ल्ड कप से पहले अपनी लय हासिल नहीं कर पाए।

अब बात नेमार के रोल की। टीम में ब्राजीलियन फुटबॉल की असली खूबसूरती अगर आज भी किसी खिलाड़ी में बची है, तो वो नेमार हैं। यही वजह है कि टीम में उनका होना भावनात्मक रूप से इतना अहम है। ब्राजीलियन फुटबॉल को दुनिया के शिखर पर पहुंचाने वाली शैली - कल्पना, विजन और क्रिएटिविटी - उनके खेल में है। चूंकि नेमार अभी पूरी तरह से फिट नहीं हैं, इसलिए यह लगभग तय है कि एंसेलोटी उन्हें एक 'इम्पैक्ट सब' के तौर पर इस्तेमाल करेंगे।

लेकिन सवाल यह है कि क्या इस अनुभवी और युवा अटैक को सपोर्ट करने के लिए ब्राजील के पास एक मजबूत मिडफील्ड है? इस पर शक है। टीम में जीको या सुकरात जैसा कोई खिलाड़ी तो नहीं है, लेकिन आज के फुटबॉल के स्टैंडर्ड पर खरा उतरने वाला प्लेयर भी मिडफील्ड में नहीं दिखता। पुर्तगाल और स्पेन जैसी टीमों का मिडफील्ड कितना क्रिएटिव है, यह फ्रेंडली मैचों में साफ हो गया। हालांकि टीम में ब्रूनो गिमारैस और कासेमीरो हैं, लेकिन दोनों ही अपने पीक पर नहीं हैं।

हालांकि, एंसेलोटी का भरोसा लुकास पकेटा पर होगा। इसका उदाहरण पनामा के खिलाफ फ्रेंडली मैच में दिखा, जब पकेटा के मैदान पर आने के बाद ब्राजील के खेल में एक नई जान और प्रवाह आ गया था। इसी वजह से मिस्र के खिलाफ मैच में पकेटा को स्टार्टिंग इलेवन में जगह मिली थी।

जिस ब्राजील ने दुनिया को डैनी आल्वेस, काफू, मार्सेलो और रॉबर्टो कार्लोस जैसे फुल-बैक दिए, उस टीम के पास इस बार उस लेवल के खिलाड़ी नहीं हैं, जो एक बड़ी कमजोरी है। इसका मतलब है कि डिफेंसिव मिडफील्डर्स को डिफेंस की ज्यादा मदद करनी होगी। डिफेंस में एडर्सन, डगलस सैंटोस, एलेक्स सैंड्रो, गैब्रियल, मार्क्विनस, डैनिलो, ब्रेमर, इबानेज और लियो परेरा हैं। वेस्ली की गैरमौजूदगी भी एक और झटका है।

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