
Mahendra Singh Dhoni: मद्रास हाई कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से जुड़ी मानहानि कार्यवाही में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि धोनी को गवाही के लिए किसी तरह का VIP ट्रीटमेंट नहीं मिलेगा और उनकी बयान-रिकॉर्डिंग कोर्ट परिसर या किसी सरकारी बिल्डिंग में ही होगी, किसी फाइव-स्टार लग्जरी होटल में नहीं। यह मामला आईपीएल 2013 स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी प्रकरण की पृष्ठभूमि में चला 100 करोड़ रुपए के मानहानि दावे से जुड़ा है।
यह आदेश पूर्व आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार की याचिका पर आया, जिनके खिलाफ धोनी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया है। रिकॉर्ड के अनुसार यह अपडेट September 02, 2026, 13:50 IST तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।
कोर्ट ने जी. संपत कुमार की उस मांग को स्वीकार किया, जिसमें कहा गया था कि धोनी सेलिब्रिटी होने के कारण किसी तरह की रियायत के हकदार नहीं हैं। इसलिए उनकी गवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कोर्ट परिसर या किसी सरकारी दफ्तर में कराई जाए और प्रक्रिया को सामान्य न्यायिक मानकों के तहत ही संचालित किया जाए, न कि किसी फाइव-स्टार होटल में।
पहला, बयान दर्ज करवाने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक ज्यूडिशियल ऑफिसर की नियुक्ति होगी। दूसरा, बयान दर्ज होने के दौरान अनवरत वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी और उसकी बिना एडिट की हुई कॉपी याचिकाकर्ता तथा कोर्ट द्वारा नियुक्त ज्यूडिशियल ऑफिसर को दी जाएगी। तीसरा, गवाही की जगह केवल कोर्ट या कोई सरकारी बिल्डिंग होगी, लग्जरी होटल नहीं।
बहस के दौरान संपत कुमार की ओर से वकीलों ने सर्वोच्च न्यायालय के एक पुराने आदेश का हवाला रखा। उस आदेश की जांच के बाद जस्टिस गोविंदराजन थिलकवादी ने संबंधित अर्जियों को मंजूरी दी। साथ ही जज ने स्पष्ट किया कि इन आवेदनों पर सुनवाई के पश्चात धोनी को भी इनके जवाब में एफिडेविट दाखिल करने का अवसर मिलेगा।
धोनी ने साल 2014 में पूर्व आईपीएस अधिकारी, Zee Media, News Nation Network और Zee News के संपादक व बिजनेस हेड रहे Sudhir Chaudhary के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। आरोप है कि आईपीएल 2013 सट्टेबाजी घोटाले में उनका नाम जोड़ा गया, जिसके लिए 100 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की गई। CSK के पूर्व कप्तान के रूप में धोनी ने कहा है कि उनकी पेशेवर साख प्रभावित हुई है, और इसी संदर्भ में मौजूदा गवाही-रिकॉर्डिंग का आदेश पारित हुआ है।