कुश्ती महासंघ की नई कार्यकारिणी सस्पेंड करने पर साक्षी मलिक ने जताई आशंका, कहा-अभी तक लिखित में कोई साक्ष्य सामने नहीं आया

Published : Dec 24, 2023, 04:57 PM ISTUpdated : Dec 24, 2023, 05:24 PM IST
Sakshi Malik

सार

अगर कुश्ती महासंघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी सस्पेंड हुई है तो राहत वाली बात है लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई लिखित आदेश सामने नहीं आया है।

नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती महासंघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजय सिंह और उनकी कार्यकारिणी को खेल मंत्रालय ने सस्पेंड कर दिया है। यह सस्पेंशन, पहलवानों के दबाव के बाद सरकार ने किया है। हालांकि, बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह के अध्यक्ष चुने जाने के बाद कुश्ती से सन्यास लेने वाली साक्षी मलिक को अभी भी संशय है। उन्होंने कहा कि अगर कुश्ती महासंघ की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी सस्पेंड हुई है तो राहत वाली बात है लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई लिखित आदेश सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि पहलवानों की सरकार से कोई लड़ाई नहीं है।

सराहा लेकिन आदेश को लेकर आशंकित

साक्षी मलिक ने खेल मंत्रालय के फैसले की सराहना की लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि निलंबन पर कोई स्पष्टता नहीं है। कहा: मैंने अभी तक लिखित रूप में कुछ भी नहीं देखा है। मुझे नहीं पता कि केवल संजय सिंह या पूरे निकाय को निलंबित किया गया है या नहीं। सरकार के साथ हमारी लड़ाई नहीं थी। हमारी लड़ाई महिला पहलवानों के लिए है, मैंने संन्यास की घोषणा कर दी है लेकिन चाहती हूं कि आने वाले पहलवानों को न्याय मिले।

ले सकती हैं सन्यास की घोषणा वापस...

साक्षी मलिक ने कुश्ती से रिटायरमेंट के फैसले में बदलाव की संभावना का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि मैं आपको फेडरेशन के गठन के मुताबिक फैसले के बारे में बताऊंगी।

खेल मंत्रालय ने किया है कुश्ती फेडरेशन को सस्पेंड

रविवार को खेल मंत्रालय ने प्रतियोगिता की मेजबानी के डब्ल्यूएफआई के फैसले को खेल संहिता की पूर्ण अवहेलना करार दिया। मंत्रालय ने यूपी के गोंडा के नंदिनीनगर में कुश्ती ट्रायल कराए जाने के नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के फैसले को स्थापित कानूनी और प्रक्रियात्मक मानदंडों के प्रति घोर उपेक्षा बताया। मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय डब्ल्यूएफआई के संवैधानिक प्रावधानों और राष्ट्रीय खेल विकास संहिता दोनों का उल्लंघन करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि नवनिर्वाचित निकाय पूर्व के पूर्ण नियंत्रण में है। पदाधिकारी खेल संहिता की पूरी तरह से अवहेलना कर रहे हैं। फेडरेशन का व्यवसाय पूर्व पदाधिकारियों द्वारा नियंत्रित परिसर से चलाया जा रहा है।

दरअसल, तीन दिन पहले ही भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पद के चुनाव में संजय सिंह निर्वाचित हुए। संजय सिंह, पूर्व अध्यक्ष व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के करीबी हैं। बृजभूषण शरण सिंह पर महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उनके खिलाफ पहलवानों ने मोर्चा खोल रखा है और दिल्ली पुलिस जांच कर रही है।

चुनाव परिणाम आने के बाद पहलवानों में हडकंप मच गया था। प्रेस कांफ्रेंस कर साक्षी मलिक ने रोते हुए अपने सन्यास का ऐलान किया था। उसके बाद बजरंग पूनिया ने अपना पद्मश्री लौटा दिया था। इसके बाद गूंगा पहलवान ने भी अपना पद्मश्री लौटाने का ऐलान कर दिया था। पहलवानों के पक्ष में जनभावनाएं उमड़ने लगी थी।

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