धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोलीं विनेश फोगाट- 'लोकतंत्र जीता और डर हार गया'

Published : Jul 25, 2026, 10:30 PM IST
Vinesh Phogat (File Photo/ANI)

सार

NEET-UG पेपर लीक विवाद में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पहलवान विनेश फोगाट ने युवाओं के आंदोलन की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि युवाओं ने साहस का असली अर्थ समझाया है। फोगाट ने कहा कि यह संघर्ष व्यर्थ नहीं गया, लोकतंत्र जीत गया और डर हार गया।

दिग्गज भारतीय पहलवान और तीन बार की ओलंपियन विनेश फोगाट ने NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश के युवाओं की सराहना की है। उन्होंने युवाओं को 'भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति' बताते हुए कहा कि 'लोकतंत्र की जीत हुई और डर की हार हुई।'

प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा था कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का फायदा 'राष्ट्र-विरोधी ताकतें' न उठाएं।

विनेश ने युवाओं के आंदोलन को सराहा

X पर एक पोस्ट में, विनेश फोगाट ने युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह देश की आत्मा को दर्शाता है और युवा प्रदर्शनकारियों के साहस को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि संविधान में विश्वास रखने वाले युवा, उन्हें डराने-धमकाने की कोशिशों के बावजूद सबसे शक्तिशाली आवाज के रूप में उभरे। उन्होंने लिखा, "यह आंदोलन ने हमें बताया कि देश की आत्मा अभी भी जाग रही है। युवा सिर्फ भीड़ नहीं होते, वो भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति होते हैं। सड़कों पर खड़े उन बच्चों ने हमें साहस का असली अर्थ समझाया। हाथों में फूल, दिलों में संविधान पर विश्वास था। जिन्हें डराने की कोशिश की गई, वही सबसे ऊंची आवाज बनकर उभरे।"

विनेश फोगाट ने कहा कि आंदोलन के दौरान कठिनाइयां झेलने वाले लोग अडिग रहे। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष को एक ऐसे क्षण के रूप में याद किया जाएगा जब लोगों ने चुप रहने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि परिणाम ने दिखाया कि "लोकतंत्र जीता और डर हार गया।" उन्होंने आगे कहा, "जिन पर लाठियां चली, उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। याद रखा जाएगा हर वो दिन, जब न्याय की मांग को दबाने की कोशिश हुई। और याद रखी जाएगी वो पीढ़ी, जिसने चुप रहने से इनकार कर दिया। खुशी इस बात की है कि संघर्ष व्यर्थ नहीं गया। लोकतंत्र जीत गया... और डर हार गया।"

देशव्यापी विरोध और 'संसद चलो' मार्च

प्रधान का इस्तीफा कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हफ्तों तक चले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और जंतर-मंतर पर वांगचुक के नेतृत्व में 26 दिनों की भूख हड़ताल के बाद आया है। इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया था, जो कथित पेपर लीक पर जवाबदेही की मांग कर रही है।

20 जुलाई को, समूह ने जंतर-मंतर से संसद तक एक 'संसद चलो' मार्च का आयोजन किया था, जिसके दौरान मध्य दिल्ली में जमा हुई भारी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की खबरें आई थीं।

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