FIFA World Cup 2026: 5 बड़ी वजह, क्यों अमेरिका में टूट जाएगा इंग्लैंड का सपना?

Published : Jun 15, 2026, 03:58 PM IST

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड की खिताबी उम्मीदों के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। कमजोर डिफेंस से लेकर हैरी केन पर बहुत ज्यादा निर्भरता तक, आइए जानते हैं कि क्यों टीम का सपना टूट सकता है।

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क्वालिफाइंग स्टेज में क्लीन शीट के बावजूद इंग्लैंड का डिफेंस कमजोर दिखता है। निको ओ'रेली का अनुभवहीन होना, जॉन स्टोन्स का चोटों से जूझना और रीस जेम्स की फिटनेस की समस्या टुचेल की टीम को कमजोर बनाती है। बैकअप खिलाड़ियों में अनुभव और आत्मविश्वास की कमी है, जिससे वे बड़ी टीमों का सामना नहीं कर पाएंगे।

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अमेरिका की गर्मी इंग्लैंड के खिलाड़ियों के स्टैमिना का कड़ा इम्तिहान लेगी। कूलिंग ब्रेक से मदद मिल सकती है, लेकिन ठंडे मौसम से आए खिलाड़ियों को संघर्ष करना पड़ सकता है। डेक्लेन राइस जैसे मिडफील्डर गेंद पर कंट्रोल नहीं रख पाते, जिससे नॉकआउट स्टेज में थकान हावी हो सकती है। इतिहास गवाह है कि यूरोपीय टीमें अपने महाद्वीप के बाहर कम ही सफल होती हैं।

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यूरो 2024 में इंग्लैंड के स्टार अटैकर रहे बुकायो साका एड़ी की चोट से जूझ रहे हैं। टुचेल ने खुद माना कि वह लगातार दो दिन ट्रेनिंग नहीं कर सकते। अगर वह खेलते भी हैं, तो इस बात पर शक है कि आर्सेनल का यह स्टार लगातार अच्छा प्रदर्शन कर पाएगा। उनके बिना इंग्लैंड का अटैक कमजोर पड़ सकता है।

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हैरी केन इंग्लैंड के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टीम के आधे से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय गोल किए हैं। उनके बिना टीम का अटैक कमजोर नजर आता है। ओली वॉटकिंस और इवान टोनी जैसे विकल्प उनके स्तर के नहीं हैं। अगर केन चोटिल हो जाते हैं, तो इंग्लैंड का अभियान तुरंत खत्म हो सकता है। यह एक खिलाड़ी पर टीम की खतरनाक निर्भरता को दिखाता है।

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खुद टुचेल मानते हैं कि इंग्लैंड फेवरेट नहीं है। दशकों से टीम दबाव में बिखरती आई है। यूरो 2020 में वेम्बली में हार से लेकर यूरो 2024 में स्पेन से मिली हार तक, 'थ्री लायंस' ने हर बड़े मौके पर निराश किया है। ब्राजील, फ्रांस या अर्जेंटीना जैसी टीमों के सामने इतिहास खुद को दोहरा सकता है।

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