Published : Jul 01, 2023, 03:35 PM ISTUpdated : Jul 01, 2023, 03:39 PM IST
भागलपुर जिले के एक गांव की कहानी मीडिया-सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। जिले के नाथनगर स्थित शंकरपुर पंचायत में जैसे-तैसे एक पिता ने अपनी बेटी की शादी तय कर दी। लेकिन जब दूल्हा उसे ब्याहकर ले जाने लगा, तो लकड़ी का पुल देखकर बिदक गया।
भागलपुर. बिहार केभागलपुर जिले के एक गांव की कहानी मीडिया-सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। जिले के नाथनगर स्थित शंकरपुर पंचायत में जैसे-तैसे एक पिता ने अपनी बेटी की शादी तय कर दी। लेकिन जब दूल्हा उसे ब्याहकर ले जाने लगा, तो लकड़ी का पुल देखकर बिदक गया। वो गांव से पैदल ही पुल पार करके 2 किमी दूर तक जाना नहीं चाहता था, जहां गाड़ियां खड़ी करनी पड़ती हैं। ससुर ने बड़ी मुश्किल में उसे मनाया। साथ ही सरकार को गांव की उपेक्षा के लिए जमकर कोसा भी। लोगों के मुताबिक, गांव के लोगों को इसी लकड़ी के पुल के सहारे आना-जाना पड़ता है।
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दुल्हन के पिता शत्रुघन मंडल ने सरकार को कोसते हुए कहा कि उनकी पंचायत मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है। गांव की लड़कियों या लड़कों से कोई भी शादी करना नहीं चाहता। बड़ी मुश्किल से उनकी बेटी की शादी तय हुई थी।
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दूल्हे को शंकरपुर पंचायत के सराय किला घाट स्थित चचरी पुल को पैदल ही पारके करके गांव से जाना था। दूल्हे को यह अपनी बेइज्जती लगी और वो भड़क गया। बड़ी मुश्किल से उसे मनाया गया, हालांकि वो नाराज होकर ही दुल्हन को ब्याह कर ले गया।
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इस शादी का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें दूल्हा और दुल्हन पैदल ही चचरी पुल को पार करके जाते दिख रहे हैं और पीछे-पीछे महिलाएं गीत गाते आ रही हैं।
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शंकरपुर दियारा भागलपुर जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर है। लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ भी नहीं है।
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