हुजूर बाप बनना है!... बिहार के कैदियों ने पत्र लिखकर लगाई अनोखी गुहार

Published : Jan 13, 2025, 11:14 AM IST
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सार

बिहार की जेलों में बंद कैदियों ने 2024 में संतान प्राप्ति के लिए रिकॉर्ड 461 आवेदन दिए हैं। विभागीय दिशा-निर्देशों के अभाव में इन आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है, कई कैदियों के आवेदन वर्षों से लंबित हैं।

पटना न्यूज: बिहार की जेलों में बंद कैदियों ने वर्ष 2024 में संतान प्राप्ति के लिए 461 आवेदन दिए हैं। यह संख्या पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है। कैदियों को संतान सुख से वंचित न होना पड़े, इसके लिए उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है। लेकिन विभाग की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलने के कारण इन आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। कई कैदी वर्षों से लगातार आवेदन दे रहे हैं, कुछ मामलों में पति-पत्नी दोनों जेल में हैं और दोनों ने अलग-अलग आवेदन दिया है।

वर्ष 2024 में सबसे अधिक आवेदन

जानकारी के अनुसार, पिछले दस वर्षों में सबसे अधिक 461 आवेदन वर्ष 2024 में आए हैं। बेउर जेल के एक कैदी ने सात जेल अधीक्षकों को आवेदन दिया है। विशेष केंद्रीय कारा भागलपुर में पिछले तीन महीने में पांच से अधिक कैदियों ने संतान प्राप्ति के लिए आवेदन दिया है। बक्सर, पूर्णिया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और बेउर जेल में ऐसे कई आवेदन लंबित हैं। पिछले पांच महीने में अकेले पूर्णिया जेल से 17 आवेदन आए हैं।

शादी के बाद कई गए जेल

ऐसे कई कैदी हैं जो शादी के बाद अपराध की दुनिया में चले गए और जेल की सजा काट रहे हैं। विशेष केंद्रीय कारा में सैकड़ों कैदी आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। ये कैदी भी संतान प्राप्ति के लिए आवेदन कर रहे हैं। केंद्रीय कारा में बंद अररिया जिले के तीन भाइयों ने भी आवेदन किया है। उनका कहना है कि तीनों भाई जेल में हैं, इसलिए वंश को आगे बढ़ाने के लिए समय मिलना जरूरी है।

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क्या है प्रक्रिया

केंद्रीय कारा पूर्णिया में तैनात प्रोबेशनर अधिकारी स्नेहा ने बताया कि संतान प्राप्ति के लिए आवेदन मिलने पर लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। सबसे पहले आवेदन संबंधित जिले के जेल अधीक्षक को दिया जाता है। फिर अधीक्षक इसे जेल आईजी और एआईजी के पास भेजते हैं। इसके बाद आवेदन राज्य स्तरीय प्रोबेशनर अधिकारी के पास जाता है।

वहां से स्वीकृति मिलने के बाद इसे संबंधित जिले के डीएम और एसपी के पास भेजा जाता है। आवेदन की सत्यता की जांच की जाती है और कैदी की रिहाई के संभावित प्रभाव का सामाजिक आकलन किया जाता है। कैदी को वाकई बच्चे चाहिए या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए परिवार के सदस्यों, पत्नी और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की जाती है। इन सबके बाद ही अनुमति दी जाती है। वहीं, पटना के प्रोबेशनर ऑफिसर असफर इमाम मलिक ने बताया कि कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद बच्चों के लिए आवेदन पर विचार किया जाता है। हाल ही में बच्चों के लिए नियमों को आसान बनाया गया है।

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